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#ItsMyDuty- Share your stories on Fundamental duties

Start Date :
Mar 12, 2020
Last Date :
Nov 26, 2020
23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
Calling for stories, videos and ideas on the 11 Fundamental Duties! ...
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Abhey Kumar Rajput
5 years 7 months ago
कौन थे गुरु तेग बहादुर!
श्री गुरु तेगबहादुर जी सिखों के नौवें गुरु हैं, उनका जन्म 1 अप्रैल 1621 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था। उनके बचपन का नाम त्यागमल था। उनके पिताजी का नाम गुरु हरगोबिंद सिंह था। वे बाल्यावस्था से ही संत स्वरूप गहन विचारवान, उदार चित्त, बहादुर व निर्भीक स्वभाव के थे। गुरु तेगबहादुर जी की शिक्षा-दीक्षा मीरी-पीरी के मालिक गुरु-पिता, हरिगोबिंद साहिब की छत्र छाया में हुई। इसी समय इन्होंने गुरुबाणी, धर्मग्रंथों के साथ-साथ शस्त्रों तथा घुड़सवारी आदि की शिक्षा प्राप्त की।
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Abhey Kumar Rajput
5 years 7 months ago
इसके बाद गुरु तेग बहादुर ने उनकी इफाजत का जिम्मा अपने सिर से ले लिया। गुरु तेग बहादुर के इस कदम से औरंगजेब गुस्से से भर गया। लेकिन इस सब से निरफिकर होकर गुरु तेग बहादुर अपने तीन शिष्यों के साथ मिलकर आनंदपुर से दिल्ली के लिए चल पड़े।इतिहासकारों का मानना है कि मुगल बादशाह ने उन्हें गिरफ्तार करवा कर तीन-चार महीने तक कैद करके रखा, बहुत यातनाएं दी ताकि वो टूट जाएं। लेकिन उन्होंने जो संकल्प लिया था उसे पूर्ण करने के लिए वो अडिग रहे। कहते हैं कि इसके बाद पिजड़े में बंद करके उन्हें सल्तनत की राजधानी दिल
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Abhey Kumar Rajput
5 years 7 months ago
कश्मीरी पंडितों के लिए ढाल बने गुरु तेग बहादुर
वैसे तो गुरु तेग बहादुर जी से औरंगजेब शुरुआत से ही चिढ़ता था। लेकिन उनकी औरंगजेब से जंग तब हुई, जब क्रूर औरंगजेब कश्मीरी पंडितों को जबरन मुसलमान बनाने पर तुला हुआ था। कश्मीरी पंडित इसका विरोध कर रहे थे, लेकिन उन्हें डराकर उनके विरोध को दरकिनार किया जा रहा था। इसके बाद पंडित कृपा रामजी ने कश्मीरी पंडितों को अपने साथ लिया और आनंदपुर साहिब जाकर गुरु तेग बहादुर से भेंट कर उनसे मदद मांगी।
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Abhey Kumar Rajput
5 years 7 months ago
ऐसे में जब गुरु तेग बहादुर ने औरंगजेब के हुक्म को मानने से इनकार कर दिया तो लोगों में कौतूहलता बढ़ गई कि आखिर वो साहसी शेर दिल है कौन! औरंगजेब की सभा में गुरु तेग बहादुर और उनके शिष्यों को पेश किया गया। एक एक कर उन्हें इस्लाम धर्म अपनाने के लिए पूछा गया, जिससे उन्होंने साफ इनकार कर दिया।
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Abhey Kumar Rajput
5 years 7 months ago
जब गुरु तेग बहादुर और उनके शिष्यों को दिल्ली लाया गया, तो उन्हें देखने के लिए लोगों की भीड़ जमा हो गई। ऐसा इसलिए भी हुआ कि उस समय क्रूर औरंगजेब के सामने नज़रे उठाने का साहस किसी व्यक्ति में नहीं था और सब उसकी क्रूरता सहते जा रहे थे। ऐसे में जब गुरु तेग बहादुर ने औरंगजेब के हुक्म को मानने से इनकार कर दिया तो लोगों में कौतूहलता बढ़ गई कि आखिर वो साहसी शेर दिल है कौन! औरंगजेब की सभा में गुरु तेग बहादुर और उनके शिष्यों को पेश किया गया। एक एक कर उन्हें इस्लाम धर्म अपनाने के लिए पूछा गया, जिससे........
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Abhey Kumar Rajput
5 years 7 months ago
लेकिन गुरु तेग बहादुर पर इस सब का कोई असर नहीं हुआ, वो भरी सभा में औरंगजेब के हुक्म के विरोध में खड़े रहे और इस्लाम कबूल करने से इंकार कर दिया। उन्होंने गर्व से कहा - मैं मर जाऊंगा लेकिन इस्लाम धर्म नहीं अपनाऊंगा। इस पर औरंगजेब ने उनके बचे हुए शिष्यों के सामने उनका सिर कटवा दिया। इसी बलिदान की याद में 24 नवंबर को प्रतिवर्ष बलिदान दिवस मनाया जाता है। जिस स्थान पर गुरु तेग बहादुर का शीश यानी सिर काटा गया था, वो जगह दिल्ली में है और अब शीशगंज गुरुद्वारे के नाम से जाना जाता है।
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Abhey Kumar Rajput
5 years 7 months ago
अब औरंगजेब गुस्से से पागल हो रहा था, उसने अपने सैनिकों से कहकर गुरु तेग बहादुर के सामने ही उनके शिष्यों के सिर कलम कर दिये ताकि उन्हें डराया जा सके। लेकिन इससे उलट गुरु जी की आंखों में लेश मात्र भी डर नहीं था। इसके बाद तो गुस्से में बौखलाए औरंगजेब ने वहीं उनके भाई मति दास के शरीर के दो टुकड़े करवा डाले, फिर भाई दयाल सिंह के शरीर को भी टुकड़ों में बांट दिया और तीसरे भाई सति दास को भी दर्दनाक मौत के घाट उतार दिया। लेकिन गुरु तेग बहादुर पर इस सब का कोई असर नहीं हुआ, वो भरी सभा में औरंगजेब के हुक्म..
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Abhey Kumar Rajput
5 years 7 months ago
ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज़ादी के बाद पिछले 73 वर्षों में हमने अपने महा-पुरुषों को वो सम्मान नहीं दिया, जिसके वो हकदार थे। हमारे देश में लुटेरे मूल के मुगल शासकों जैसे औरंगजेब और अकबर के बारे में आपको कई पुस्तकें मिल जाएंगी। यहां तक कि पाठ्यपुस्तकों में इनकी कहानियां शामिल हैं और कुछ लेखकों ने तो बड़ी बेशर्मी से इनकी प्रशंसा करते हुए इन्हें महान भी बताया गया है। लेकिन जिन महापुरुषों ने इन राजाओं के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपना बलिदान दिया उनकी चर्चा कम या न के बराबर ही होती है।
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Abhey Kumar Rajput
5 years 7 months ago
गुरु तेग बहादुर कोई राजा नहीं थे जो अपने वचन को पूरा करने के लिए बाध्य होते। वो चाहते तो कश्मीरी पंडितों की मदद करने से मना कर सकते थे और अपनी जान बचा सकते थे। पर उन्होंने धर्म का मार्ग चुना क्यों कि उनका उपदेश था, "धर्म का मार्ग सत्य और विजय का मार्ग है"। गुरु तेग बहादुर द्वारा निभाये गए इसी बलिदान की परंपरा पर देश को गर्व है। हमें अपने असली नायकों को पहचानना चाहिए और उन्हीं का सम्मान करना चाहिए न कि लुटरे मूल के क्रूर शासकों का।
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Dr Guinness Madasamy
5 years 7 months ago
It declares India to be a sovereign, secular, socialist, and democratic republic and assures its citizens' equality, liberty, and justice.
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