NAWAR KHERA NAINITAL
10 years 8 months ago
स्थानीय भाषा कॊ पाट्यक्रम मॆ स्थान दॆना चाहियॆ, हिन्दी भाषा कॊ अत्यधिक साहित्यिक न बनाकर मानक कॆ रुप मॆ प्रयुक्त किया जाना चाहिए, जिससॆ व्यापक रुप मॆ हिन्दी का प्रचार प्रसार हॊ सकॆ।
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