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Promotion of Languages

Promotion of Languages
Start Date :
Jan 22, 2015
Last Date :
Nov 01, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
Submission Closed

A multi-lingual society recognises the importance of education in languages. While there are some interventions for appointment of language teachers and promotion of classical ...

A multi-lingual society recognises the importance of education in languages. While there are some interventions for appointment of language teachers and promotion of classical languages, there is no comprehensive scheme or language policy and we need to have inputs on this dimension.

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Showing 1237 Submission(s)
Vikas Sharma_13
Vikas Sharma_13 11 years 2 months ago
जन्म के पश्चात बालक जिस मातृ भाषा में बोलना प्रारम्भ करता है एवं अपनी सर्वश्रेष्ठता सिद्ध करने का प्रयास करता है यदि उन मातृ भाषाओंं को पाठ्यक्रम में समुचित स्थान दिया जाये तो भाषाओँ का संवर्धन निश्चित रूप से हो सकेगा ! ऐसा करने से प्रत्येक व्यक्ति राष्ट्र के निर्माण में मातृ भाषाओँ के माध्यम से अपना योगदान दे सकेगा !इसलिए यदि हमें यह सुनिशित करना है कि सभी राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान दें तो मातृ भाषाओँ को उनका समुचित स्थान देना होगा !
Narendra Kumar Pal
Narendra Kumar Pal 11 years 2 months ago
किसी भी प्रकार की सम्पत्ति पर किसी भी व्यक्ति विशेष का स्वत्वाधिकार नहीं होना-रहना चाहिए । सभी किसी भी प्रकार सम्पत्ति का मालिकान सरकार का ही होना-रहना चाहिये फिर तो चोरी-लूट-डकैती अधिकतर मार-काट-बेइमानी-घूसखोरी आदि भ्रष्ष्टाचार सहज ही समाप्त हो जायेगा । निष्काम कर्म की पद्धति को प्रभावी तरीके से लागू करना-कराना चाहिए । सच्चे सम्पन्न-विकसित नागरिकता हेतु निष्कामी कर्मचारी अधिकारी-व्यापारी और नेता होना अनिवार्य होना चाहिए ।
Narendra Kumar Pal
Narendra Kumar Pal 11 years 2 months ago
क्षेत्रीय भाषा के साथ साथ हिंदी संस्कृत अंग्रेजी आदि भाषाओं को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से विस्तार करना |
Narendra Kumar Pal
Narendra Kumar Pal 11 years 2 months ago
भेद-भाव रहित ‘एकल स्थिति’ हो सभी नागरिकों का एक ही धर्म, एक ही समाज, एक ही परिवार, एक ही दल, एक ही रीति-रिवाज, एक ही भाषा, एक समान ही उत्तम खान-पान एवं रहन-सहन तथा एक ही शिक्षा-दीक्षा अनिवार्यतः लागू होना चाहिए । भेद-दृष्टि को ही बदलने की तथा अभेददृष्टि स्थापित करने की व्यवस्था करना सरकार की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए ।
Ravindra Nath Patel
Ravindra Nath Patel 11 years 2 months ago
भेद-भाव रहित ‘एकल स्थिति’ हो सभी नागरिकों का एक ही धर्म, एक ही समाज, एक ही परिवार, एक ही दल, एक ही रीति-रिवाज, एक ही भाषा, एक समान ही उत्तम खान-पान एवं रहन-सहन तथा एक ही शिक्षा-दीक्षा अनिवार्यतः लागू होना चाहिए । भेद-दृष्टि को ही बदलने की तथा अभेददृष्टि स्थापित करने की व्यवस्था करना सरकार की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए ।
Mithlesh Sharma
Mithlesh Sharma 11 years 2 months ago
भेद-भाव रहित ‘एकल स्थिति’ हो सभी नागरिकों का एक ही धर्म, एक ही समाज, एक ही परिवार, एक ही दल, एक ही रीति-रिवाज, एक ही भाषा, एक समान ही उत्तम खान-पान एवं रहन-सहन तथा एक ही शिक्षा-दीक्षा अनिवार्यतः लागू होना चाहिए । भेद-दृष्टि को ही बदलने की तथा अभेददृष्टि स्थापित करने की व्यवस्था करना सरकार की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए ।