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अप्रेंटिस अधिनियम, 1961 में संशोधन पर सुझावों का आमंत्रण

आरंभ करने की तिथि :
Apr 09, 2021
अंतिम तिथि :
May 10, 2021
23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

आम जनता / हितधारक को सूचित किया जाता है कि कौशल विकास और उद्यमिता ...

आम जनता / हितधारक को सूचित किया जाता है कि कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) युवाओं हेतु शिक्षुता के अवसरों को बढ़ाने के उद्देश्य से ‘अप्रेंटिस अधिनियम, 1961 में संशोधन पर टिप्पणी / सुझाव आमंत्रित करता है।

कोई भी व्यक्ति/हितधारक अपनी टिप्पणी/सुझाव भेजने के इच्छुक हैं, वह ईमेल के माध्यम से भेज सकता है। मेल anita.sriv@nic.in पर इसके प्रकाशित होने के 30 दिन के भीतर भेजा जा सकता है।

‘अप्रेंटिस पर शिक्षुता अधिनियम, 1961 पर कांसेप्ट नोट’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

सुझाव भेजने की अंतिम तिथि 10 मई 2021 है।

फिर से कायम कर देना
1081 सबमिशन दिखा रहा है
Putan tiwari
Putan tiwari 5 साल 1 महीना पहले
भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी,! वैक्सीन भारत में निर्मित ही का उपयोग हो तो अति उत्तम है।एक तो है दुनिया भी देख लेगी की भारत इसमे सक्षम हैऔर इसके साथ ही साथ आयुर्वेदिक काढ़ा पर भी जोर देना चाहिए इससे इम्य़ुनिटी पावर बढ़ेगा अर्थात रोग प्रतिरोधक क्षमता की बढ़ोत्तरी होगी।
Raju Sain
Raju Sain 5 साल 1 महीना पहले
लॉकडाउन का मुख्य उद्देश्य कोरोना से बचाने हेतु आपस में संपर्क में न आना परंतु 3 घंटे के लिए मार्केट खोलना बिल्कुल गलत है । लॉकडाउन में कोरोना का उद्देश्य भी पूरा हो और आर्थिक स्थिति भी खराब न हो अतः मेरे सुझाव- 1-एक दिन दायें साइड का मार्केट 16 घंटे खोलें दूसरे दिन इसी प्रकार बायें साइड का मार्केट । 2- पाँच व्यक्ति से ज्यादा एक ही जगह पर एकत्रित न हो और वह भी 6 फीट की दूरी बनाए हुए न हो तो तीनों पर तुरंत जुर्माना हो । 3- दो गज दूरी मास्क जरूरी का पालन
chandan kumar singh
chandan kumar singh 5 साल 1 महीना पहले
मेरे विचार से सरकार को विदेशी वैक्सीन को भी भारतीय बाजार में उतारना चाहिए तथा उन वैक्सीन कंपनियों को चयन करना चाहिए जो कि रखरखाव यानी की उसके लिए कम तापमान की जरूरत नहीं हो और सस्ती भी होनी चाहिए तभी हम वैक्सीन के लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं और अधिक से अधिक जाने बचा सकते हैं नहीं तो लोग भीड़ में वैक्सीन लगाने के चलते ज्यादा से ज्यादा कोरना फलेगा। सरकार को मुनाफा ना देख कर विदेशी कंपनी को भारत में trial करने की अनुमति देना तभी हम ज्यादा से ज्यादा जाने बचा सकते हैं स्वदेशी लक्ष्य को छोड़ें
H R Bansod
H R Bansod 5 साल 1 महीना पहले
Stipend free Apprenticeships would be a boon to upcoming small and micro business and cottage industries If apprenticeship start at secondary school level, it will promote dignity of labour and respectability of all professions Young adults should be encouraged to take up apprenticeship in varied fields with atleast 1 apprenticeship in environment friendly /sensitive area or green industry. Apprenticeship will surely add to giving enriched experience and lead to better pay on getting employed