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आईआईटी मुंबई और आईआईएससी बंगलुरु में नैनो प्रोद्योगिकी का प्रयोग किस प्रकार किया जाए

आरंभ करने की तिथि :
Sep 10, 2014
अंतिम तिथि :
Sep 30, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
आईआईटी मुंबई और आईआईएससी बंगलुरु द्वारा आयोजित एवं इलेक्ट्रॉनिकी ...
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Anand Krishna
11 साल 6 महीने पहले
All Research institutes are becoming copycats of other countries. Where is the R&D in India. Govt should only promote new technologies, not copied.
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sanjai kumar rai
11 साल 6 महीने पहले
कूड़ा /कचरा प्रबंधन एवं पैकेजिंग के क्षेत्र मे इस तकनीक के प्रयोग से काफी सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे ।
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hemanth kumar motamarri
11 साल 6 महीने पहले
By giving projects to the students of any college and also to do experiments regarding its use in transport system as hydrogen fuel powered vehicles.it also serves as prevention of depleted fossil fuels
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Devdip Guha Mazumder Guha Mazumder
11 साल 6 महीने पहले
PLEASE TAKE THE HELP OF BENARAS HINDU UNIVERSITY. BECAUSE THE USED OF NANO TECHNOLOGY WAS USED DURING THE EPIC TIME.
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vinoth kumar
11 साल 6 महीने पहले
First, find out what are the new NANO device in market which is useful to govt offices/sectors and make use of them.
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Amit Mohan
11 साल 6 महीने पहले
Instead of chasing the technology mastered by other nations, the commercial application part should be explored at broader level with NIT (National Institute of Technology) as research and development centres with supervision by IIT and IISc scientists with profit sharing.
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Manish Khanna
11 साल 6 महीने पहले
Do not involve Government officers and politicians.
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chandan narayan
11 साल 6 महीने पहले
Try to give more and more advertisements in the newspapers and also as posters in colleges. This will in one way popularize the event and also all the eligible and most interested students can make use of it with out any problems.
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Vinod Kumar Maheshwari
11 साल 6 महीने पहले
sir/madam, if we emphasize on products by nano technology thru' advertisements, it would be focused more by the common man.
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Sushil Agarwal
11 साल 6 महीने पहले
Make the technology Open-source so youngsters from all over India can study and research on the technology and its applications.
There should be a contract with every researcher thus allowed that all findings and subsequents inventions will be patented jointly in the name of Researcher and Govt of India and can be put to public/strategic use by GOI.
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