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खादी के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार

Rural Women Employment through Khadi
आरंभ करने की तिथि :
Feb 01, 2015
अंतिम तिथि :
Apr 01, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

खादी कपड़े का नमूना मात्र नहीं है। यह दर्शन, जीनेकी राह, सशक्तीकरण, ...

खादी कपड़े का नमूना मात्र नहीं है। यह दर्शन, जीनेकी राह, सशक्तीकरण, आत्मक निर्भरता की प्रतीक, इतिहास का गौरव, महात्मापगांधी के दर्शन का मूल मंत्र है।

माननीय प्रधानमंत्री जी ने दिनांक 03 अक्तूेबर, 2014 को अपने रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” पर कहा था कि ''हमें खादी के प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिए तथा हमें खादी की कम से कम कोई एक वस्त्र'अवश्य खरीदनी चाहिए। यदि आप खादी खरीदते हैं तो आप एक निर्धन के घर में समृद्धि का दीप प्रज्व्ढ़लित करते हैं।'' इस अपील से भारत के विभिन्नए बिक्री केंद्रों में खादी की बिक्री 125 प्रतिशत तक बढ़ गई है। इससे खादी की प्रच्छखन्नय मांग प्रतिबिम्बित होती है जिसकी पूर्ति करने की जरूरत है,उससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का सृजन होगा। स्कूतल, अस्प ताल, रेलवे, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम,आर्मी, केन्द्री य पुलिस बल, फैशन हाउस, आदि खादी के सम्भारवित उपभोक्ताक हो सकते हैं।

खादी उत्पा्द की यूएसपी (USP) पर्यावरण अनुकूल, लगभग कार्बन शून्य प्रकृतिहै जिसके उत्पादन मेंतकरीबन शून्य) जल चिह्न होता है। यह सामाजिक-आर्थिक रूप से संपोषणीय वस्त्रद उत्पानद है। यह एक बारहमासी तथा एलर्जी मुक्ता वस्त्र है। इसलिए खादी का प्रयोग 'जीरो इफेक्टय'और'जीरो पॉवर्टी' इंडिया की ओर एक कदम है।

वर्तमान में खादी क्षेत्र में कार्यरतश्रमिक 1200 रुपये से 1800 रुपये प्रतिमाह कमा रहे हैं। एमगिरी वर्धा ने सौर चरखा विकसित किया है जो मौजूदा चरखे पर कड़ी मेहनतको कम करने के साथ-साथ आमदनी में चार गुनी वृद्धि कर सकता है। इस कड़ी में एमएसएमई मंत्रालय ग्राम- खानवा, जिला-नवादा, बिहार में प्रायोगिक परियोजना शुरू करने जा रहा है जहाँ सूत कातने के लिए ग्रामीण महिलाओं में 100 सौर चरखे वितरित किए जाएंगे। 'ग्रामनिर्माण मंडल'खादी प्रतिष्ठान गया के साथ बाईबैक व्यरवस्था के अंतर्गत इन सूतों से खादी उत्पाखद बनाए जाएंगे। इस स्कीोम से महिला कारीगरों को संभवत: तकरीबन 5000 रुपयेसे 8000रुपये प्रति माह मिलने की संभावना है। ग्रामीण महिलाओं के जीविकोपार्जन के इस मॉडल को बढ़ायाजाना है जिससे आगामी वर्षों में करोड़ों ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के विजनरी लक्ष्यो को प्राप्तग किया जा सके।

इस कदम के साथ-साथ प्रथम चरण में अगले पाँच वर्ष में मौजूदा 0.4 प्रतिशत से 5 प्रतिशत वस्त्रन क्षेत्र में खादी की बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने केदूसरे विजनरी लक्ष्यी की पूर्ति की प्रत्यााशा है।

उपर्युक्त दोहरे विजनरी लक्ष्‍यों के अनुसरण में आपसे अनुरोध है कि आप निम्नुलिखित पर अपने बहुमूल्यक विचार दें:

1. खादी का उत्‍पादन एवं बिक्री कैसे बढ़ाएं?
2. विशेषकर युवाओं एवं विदेश में रहे लगभग 2.5 करोड़ अनिवासी भारतीयों के बीच खादी उत्पादों के लिए आला बाजार (Niche) का सृजन कैसे करें?
3. खादी उत्पा दों के बारे में जागरूकता कैसे उत्पन्न करें?

आप अपनी टिप्पणियां 31 मार्च 2015 तक भेज सकते हैं।

फिर से कायम कर देना
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Anup Kumar
Anup Kumar 11 साल 4 महीने पहले
Sir i have opnion on bihar,wb and up election. create proper dalit leaders and create dalit wing of bjp which sp work for dalits.with the supporter of dalits bjp will be unfodadible.Have some populism in your budget sir.specially to poor and middle class,Speacially to poor.Don't ignore the poor and farmers.Reforms are good but what the point if other gov enojy your work and you only face criticism.
Narasimhan Krishnappa
Narasimhan Krishnappa 11 साल 4 महीने पहले
Dear PM Sir, My suggestions:-- Khadi to be declared as national dress for uniforms in central/state/Govt. owned subsidiaries/ pvt.industries -- Request all INDIANS to wear Khadi atleast one day in a week --Organise Khadi mela atleast once in 3 months all over INDIA--Make Khadi dress compulsory in Air India/ Railways-- Khadi dresses to be worn by our delegates to foreign countries. Some of these measures will increase khadi demand exponentially thereby provide rural women employment
PANKAJ GUPTA
PANKAJ GUPTA 11 साल 4 महीने पहले
In the Govt. Departments which deals with the customer service, uniform should be made compulsory. In the absence of uniforms and i card wearing by the employees, it is difficult to understand who actuallly is the employee. Eg. In Income tax department, Assessing officers hire private persons to do their work. And it is difficult to understand who is the Govt. official.
Swatantra Anand
Swatantra Anand 11 साल 4 महीने पहले
कि देश जब आजाद हुआ तब आबादी ४५ करोड़ थी ? जनसंख्या ६८ सालों मे बढकर आज १२५ करोड़ से ऊपर हो रही है ? गरीब और गरीबों को आजतक पाला गया है ? उन्हें दया व भीख का पात्र समझा गया है ? आज सरकारी आमदनी का श्रोत सिर्फ २०% आबादी से होता है ? जबकि ८०% लोग अल्प रोजगार के भरोसे है ? वो सभी देश के मुख्य धारा में प्रवेश पाने से वंचित हैं ? हम समझ रहे हैं कि आप उन्हें भी मुख्य धारा में लाना चाहते हैं ? परन्तु इन प्राचीन जीवों को कौन समझाए ? अभी आपको प्रेस व मीडिया से पूर्वानुमान मे ही सुचित कर देना चाहिए कि आपके द्वारा भूमि अधिग्रहण अध्यादेश ग्रामीण की सर्वाधिक मुवावजा व उनके हित की सुरक्षा अन्ना मंडली के अपेक्षाकृत ज्यादा हितकारी है ? हमें आपके भी प्रति क्रिया की अपेक्षा रहती है ? कृपया सूचित करते रहे? जय हिन्