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दिवालियापन कानून संशोधन समिति की अंतरिम रिपोर्ट

आरंभ करने की तिथि :
Feb 13, 2015
अंतिम तिथि :
Feb 20, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
श्री टी. के. विश्वेनाथन, पूर्व लोक सभा महासचिव और विधि सचिव की ...
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Dr SANJAY KUMAR SRIVASTAVA
11 साल 4 महीने पहले
Dear. Modi ji, Punjab. Is. Suffering. BC. Of. Corruption Punjab is bleeding , Pls. Break your Alliance with AKALI Dal or Else. BJP will. Face Same Result as. In Delhi. You Are. Loosing credibility. Among. People..Mass.
For. Gods. Sake.. AKALI`s. Have. Ruined.. Looted. Punjab... You. Know. .. If. You. Are. Real. Patriot. Save. Punjab.. Save. India.. Bring. Culprit. To. Justice..
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RAVINDER KHULLAR
11 साल 4 महीने पहले
Despite of several efforts by our Institute and various senior members of the profession, the govt decided to give autonomy to public sector banks for appointing their statutory auditors.RBI has asked these banks to make a board approved policy for making such appointments. However, all the banks have selected firms of their choice without giving any reason for preferring one firm over the other. This practice will again lead to high volume of NPAs remaining undetected due to obliged auditors.
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PARAS HARIA
11 साल 4 महीने पहले
Corruption is the most sensetive factor where a common man is concerned. That effect we saw in delhi. Modiji is working on abolishing laws. But most corrupted Department and associated laws to be corrected. Modiji want people to start business of own and it requires VAT number and to take that u need yo pay minimum Rs 10000 bribe inspite you want to do fair business and here common man gets hurt. Municipal shop license again bribe. Can we remove all these and just have BTT simple solution for
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Swatantra Anand
11 साल 4 महीने पहले
ऐसी संस्थाओं पर या तो समय सीमा बद्ध तरीके से ६ माह के भीतर सभी आवश्यक दस्तावेज के साथ केस दर्ज का निर्देश हो और ३बार की कार्यवाही खत्म करके फैसला देने का प्रावधानों का लागू कराना अति आवश्यक है ? अन्यथा न तो भ्रष्टाचार मिटेगा व न तो पीडित पक्ष को संस्था का सदुपयोग साबित होगा ? अतः श्रीमान जी से अनुरोध है कि कानून मंत्रालय को निर्देश दें कि या तो इस बेकार संस्था को निरस्त करें अथवा इसमें जान फूंक कर जनता के हित में ६ महीनों में फैसला सुनाने का दायित्वों का निर्वहन करें ? जिससे कम से कम एक क्षेत्र में अच्छे दिन आ गए कि शुरुआत तो हो जाए ? जय हिन्द
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Swatantra Anand
11 साल 4 महीने पहले
कार्य वाही हेतु दोनों पक्षों को एक साथ ही सारे सबूतों के लिए पहली बार में एक महीने में लिया जा सकता है ? रिज्वाईन्डर व काउंटर रिज्वाईन्डर हेतु एक एक महीनों में पूरा करके कुल ६ महीनों में फैसला दिया जा सकता है ? परन्तु रजिस्ट्रार लेवल तक के लोग ही सारी आयोग के गतिविधियों को भ्रष्टाचार के तहत चला रहे है ? आयोग के आसानी न्यायाधीश लोगों को इस बात की परवाह नहीं होतीं की ६ माह तक की तारीख देने का क्या औचित्य है? यदि ४ साल या अधिक समय लग जाए तो पीडित ग्राहक को एसे न्याय से क्या फायदा ? इससे तो प्रति पक्ष को ही फायदा मिलता है कि ग्राहकों के गाढी कमाई को हडप कर उनके पैसों का दुरुपयोग करने की कानूनी शरण मिल जाती है ? और फैसला आने पर बैंक रेट का ब्याज देकर छुटकारा पा जाता है? एऐसा क्यों है कि मै स्वयं भुक्त भोगी हूँ ।
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KAUSHIK MEHTA
11 साल 4 महीने पहले
FOR ANY LAW RELATED ISSUE MAKE COMPULSORY THAT NO DATES MORE THAN 10 WILL BE GIVEN AND TIME LIMIT BETWEEN TWO DATES MUST NOT MORE THAN 7 DAYS. ALSO NO JUDGE CAN PUT A MARK OF NOT BEFORE ME AS ON THE SEAT OF JUDGE HE MUST NOT HAVE ANY FEELING OF RELATION FOR THE JUDGEMENT OF CASE AND IF HE HAVE SOCH FEELING THEN HE SHOULD LEAVE THE JOB..
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Swatantra Anand
11 साल 4 महीने पहले
प्रधानमंत्री जी आपका ध्यान " जिला आयोग , राज्य ग्राहक आयोग व राष्ट्रीय ग्राहक आयोग " के निष्क्रियता के संदर्भ में आकर्षित कराना चाहता हूं कि इन संस्थाओं का आज के परिवेश में कोई उपयोग नहीं है ? क्योंकि यदि कोई ग्राहक इन संस्थाओं का दरवाज़ा खटखटाता है तो वहां के रजिस्ट्रार लेवल तक के ही अधिकारी पीडित पक्ष का केस दर्ज कराने में और बोर्ड पर सुनवाई व प्रति पक्ष को नोटिस की कार्यवाही में ही ६ महीने से १२ महीने का समय बरबाद कर देता है ? फिर एफीडेविट ,रिज्वाइन्डर , काउंटर रिज्वाइन्डर व क्लोजर में २४ से ३६ महीनों का समय बरबाद कर देते है ? और फाइनल आरगुमेन्ट हेतु व फैसला हेतु कुल ४८ महीने व अधिक समय बरबाद कर देते हैं ? जान बूझ कर भीड़ व केस के भरमार का बहाने बनाते हैं ? जबकि सिर्फ ४ स्टेज की..
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Saurabh Bisen
11 साल 4 महीने पहले
our indian banks are for the promotion and the support of gthe indian companies henceonly indian companies should be given the loan and the foreign companies and foreign enterpreuners should not be given loan from the indian banks and any support to them becausxe in our indian banks there is the money of indians no foreign is eligible to take it as a loan
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MAHENDRA KUMAR NAYAK
11 साल 4 महीने पहले
Co-operative societies fall under the State List in the Constitution and there are State specific legislations for co-operative societies which often include provisions relating to winding up. In addition, the Co-operative Societies Act, 191211 and the Multi-State Co-operative Societies Act, 200212, which are both central acts, also include provisions for the dissolution and winding up of co-operative societies registered under them.
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Kadali RK Rao
11 साल 4 महीने पहले
Required Mechanism to determine & fix MRP Rates on Medicines, Cloths, Food Items commonly required & used by the larger public so as to protect them from out right exploitation by Big Industrialists, Traders, Agents. Such Mechanism should be free from discrimination to give scope to indulge in corrupt practices but to encourage honesty with public dealings.
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