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दिवालियापन कानून संशोधन समिति की अंतरिम रिपोर्ट

Interim Recommendations of the Bankruptcy Law Reforms Committee (BLRC)
आरंभ करने की तिथि :
Feb 13, 2015
अंतिम तिथि :
Feb 20, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

श्री टी. के. विश्वेनाथन, पूर्व लोक सभा महासचिव और विधि सचिव की ...

श्री टी. के. विश्वेनाथन, पूर्व लोक सभा महासचिव और विधि सचिव की अध्यटक्षता में भारत में कंपनी दिवालियापन से संबंधित विधिक तंत्र के बारे में अध्यलयन करने के लिए कार्यालय आदेश 7/2/2014-एफएसएलआरसी दिनांक 22.08.2014 द्वारा एक समिति का गठन किया गया।

दिवालियापन संबंधी विधि सुधार समिति (बीएलआरसी) ने वित्ति मंत्रालय को अपनी अंतरिम रिपोर्ट 5 फरवरी, 2015 को प्रस्तुसत की। रूग्णे कंपनियों का 'पुनरुत्थाान/पुन: प्रचलित करने और पुन: व्य्वस्थिसत करने' तथा 'कंपनियों को 'बंद करने/ परिसमाप्तप करने' के उपबंधों से संबंधित समिति की प्रधान अनुशंसाएं निम्न।वत हैं :

• राहत पहुंचाने की ऐसी कार्रवाइयां शुरू करने के लिए साधारण नकदी आधारित जांच करना जिससे विचाराधीन व्यीवसाय के हित को क्षति पहुंचाएं बिना वित्तीदय कठिनाई की शीघ्र पहचान और समय पर उपाय करना सुकर हो;

• कतिपय मूल्य के अप्रतिभूत ऋण से संबंधित असुरक्षित ऋणदाताओं को उनके हितों की रक्षा करने और वित्त के वैकल्पिऋक स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए राहत कार्यवाहियां प्रारंभ करने की उन्हेंर अनुमति देना;

• किसी कंपनी को बचाने या परिसमाप्तं किए जाने का निर्धारण करने के लिए, उसके व्य वसाय की लाभप्रदता के आकलन की समय-सीमा घटाना और तत्संिबंधी प्रक्रिया को सुप्रवाही बनाना;

• राष्ट्री य कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) के बुद्धि-विवेक के मार्गदर्शन हेतु बुनियादी आधार तैयार करके, बचाव की कार्यवाहियों के दौरान ऋण स्थागन को मंजूर करने और लागू करने की प्रक्रिया को और अधिक वस्तुकनिष्ठं बनाना तथा मुकदमेबाजी से बचना;

• बचाव विषयक कार्यवाहियों के भाग के रूप में कंपनी प्रशासक (बचाव प्रक्रिया के समन्वचयन और प्रबंधन के लिए नियुक्त दिवाला व्यंवसायी) की नियुक्तिम में सुरक्षित ऋणदाताओं के नियोजन की व्यनवस्थाक करना ताकि वे बचाव प्रक्रिया में भाग लेने को प्रोत्सा हित हों और वसूली की ऐसी पृथक कार्रवाइयां न करें जिनसे लाभप्रद व्य वसाय ठप्पह हो जाने की संभावना हो;

• (क) बचाव प्रक्रिया के अंतर्गत कंपनी प्रशासक द्वारा प्रबंधन या आस्तिसयों के अधिग्रहण और (ख) ऐसा अधिग्रहण होने की सूरत में ऐसे प्रशासक, प्रबंधकीय कार्मिक और शेयरधारकों के बीच अंत:संबंध के नियंत्रण से जुड़ी निश्चिकत प्रणाली की व्यवस्थाश की जाए;

• अंतरराष्ट्री य बेहतरीन क्रियाविधियों के अनुरूप कतिपय सांविधिक शक्तिचयां प्रदान करते हुए बचाव संबंधी मूलभूत कार्यों के लिए एनसीएलटी पर कंपनी प्रबंधक की निर्भरता घटाई जाए;

• इन स्थि;तियों का प्रावधान करने के लिए फेरबदल लागू करके पुनरुत्थापन की योजना को स्वी कृत करने हेतु उचित एवं निश्चिेत तंत्र की व्‍यवस्थाप की जाए (क) समान श्रेणी के ऋणदाताओं के साथ समान व्य वहार (ख) सहमत न हो रहे ऋणदाताओं के हितों की रक्षा; और ऐसी योजना के स्वी‍कृत हो चुकने के बाद व्यावसाय द्वारा सृजित नकदी आवक का स्थाकनांतरण न होने देना;

• ऋणदाताओं की अपेक्षित प्रतिशतता द्वारा अनुमोदन के अध्यनधीन, पुनरुत्थाोन योजना के अंतर्गत 'बचाव वित्त ' जुटाने और ऐसे वित्तधपोषकों को सर्वोच्चर प्राथमिकता प्रदान करने का समर्थकारी उपबंध किया जाए;

• किसी कंपनी को बंद करने संबंधी संविधि की मांग पर आधारित जांच का ऋण प्रवर्तन कार्य यह स्पबष्टध करते हुए पुन: प्रारंभ करना कि ऐसे परीक्षण के लिए (वाणिज्यि्क या तुलन पत्र की दृष्टित से) वास्तोविक रूप से दिवालियापन के प्रमाण की जरूरत नहीं है जैसाकि विधि निर्माताओं का आशय है। इसके साथ ही इस उपबंध के दुरूपयोग को रोकने के लिए उपयुक्ति सुरक्षोपाय किए जाएं (यह निर्धारित करने के मापदंड सहित कि क्या ऋण विवादग्रस्तप है या नहीं);

• कतिपय स्थिकतियों में सुरक्षित ऋणदाताओं के प्रतिभूति हित पर प्राथमिकता अधिकारों को, किसी ऐसे राज्यर या केंद्रीय कानून में निहित किसी प्रतिकूल बात के रहते हुए भी बनाए रखा जाए, जो निर्धारिती की आस्तिहयों पर प्रथम प्रभार के रूप में विशिष्टब सांविधिक उपबंध द्वारा सरकार को देय कर या राजस्वा आरोपित करता हो;

• ऋणदाता/सार्वजनिक निधियों की ऐच्छिंक चूकों और कुप्रबंध को रोकने के लिए अंतरराष्ट्री य स्तजर पर बेहतरीन क्रियाविधियों के अनुरूप, दिवालियापन में कारोबार और प्रबंधकीय उत्तजरदायित्वत के परिवर्जन संबंधी उपबंधों को सुदृढ़ किया जाए;

• दिवालियापन से जुड़े व्यिवसायियों (प्रशासक और परिसमापक) के नियंत्रण हेतु ऐसा मजबूत तंत्र उपलब्धे कराया जाए, जिसमें आचरण और हितों के टकराव संबंधी नियम भी शामिल हों;

• दिवालियापन की कार्यवाहियों में क्रियाविधि और प्रक्रिया से जुड़े मसलों का समाधान किया जाए : (क) एनसीएलटी के कार्यकरण के नियमों में यह सुनिश्चिित करने के सुरक्षोपाय होने चाहिए कि अलाभप्रद कर्जदार को स्थागनों, आस्थशगनों और विलंब कराने वाली विषयेतर बातों से जुड़ी प्रविष्टिोपूर्व प्रक्रियाओं का लाभ लेने की अनुमति न दी जाए; (ख) एनसीएलटी के सदस्योंव और दिवालियापन के व्य वसायियों के सतत प्रशिक्षण का तंत्र यह सुनिश्चि त करने के लिए विकसित किया जाए कि उन्हेंत (i) पुराने तंत्र की विफलता के कारणों और (ii) समापन तथा बचाव मामलों में तकनीकी मसलों की पूरी जानकारी है; (ग) उच्चस न्यााय व्यलवस्थाम को (i) परिसमापन और बचाव कार्यवाहियों में होने वाले विलंबों की आर्थिक लागतों (ii) गुणावगुण की समीक्षा करने से एनसीएलटी और राष्ट्रींय कंपनी विधि अपील अधिकरण (एनसीएलएटी) को अलग रखने के लाभों के प्रति सुग्राही बनाया जाना चाहिए; और (घ) एनसीएलटी और एनसीएलएटी को, लंबित मामलों की संख्याय, निपटाए गए मामलों की संख्याी और मामलों के निपटान में लगे समय जैसे विषयों पर वार्षिक सांख्यि कीय आंकड़े दर्ज करने चाहिए। ये आंकड़े सरकार और उच्चीतम न्याायालय को अग्रेषित किए जा सकते हैं जो मानक कार्यक्षमता के पैरामीटरों पर आंकड़ों का मूल्यां कन कर सकते हैं और जब भी जरूरी हो, प्रक्रियागत नियमों को कड़ा करने की सुधारात्मऔक कार्रवाई की अनुशंसा कर सकते हैं।

• नए कंपनी अधिनियम के बचाव और परिसमापन संबंधी उपबंधों का प्रचालन एनसीएलटी और एनसीएलएटी के प्रचालन पर आश्रित है। बीएलआरसी नई प्रणाली के कार्यान्वीयनार्थ निम्नतलिखित की अनुशंसा करती है;

• भारत संघ बनाम मद्रास बार एसोसिएशन (''दि एनसीएलटी केस'') और मद्रास बार एसोसिएशन बनाम भारत संघ (दि नेशनल टैक्सत ट्रिब्यू नल केस'') के संबंध में उच्चितम न्यांयालय द्वारा दिए गए निर्णयों के अनुरूप एनसीएलटी और एनसीएलएटी से संबंधित उपबंधों में संशोधन किया जाए और किसी अतिरिक्तल मुकदमेबाजी का पूर्व निषेध करने के लिए उच्चनतम न्या यालय के समक्ष फिलहाल लंबित मामले की अगली सुनवाई में इस न्‍यायालय के समक्ष सम्याक अभ्यालवेदन प्रस्तुमत किया जाए - बीएलआरसी ने विशिष्टल संशोधन चिह्नित किए हैं जिन्हेंप इन दो निर्णयों का अनुपालन कराने के लिए लागू किए जाने की जरूरत है;

• बीएलआरसी, स्टा‍क एक्सोचेंजों और समाशोधन निगमों में कारोबार के निपटान और इन्हेंर निवल करने के उन उपबंधों का प्रावधान कराने के लिए प्रतिभूति संविदा विनियमन अधिनियम, 1956 में संशोधन हेतु सेबी के प्रस्ताकव से सहमत है जिनसे पूंजी बाजारों में निर्णायक निपटान के हित में समाशोधन सदस्योंा और व्यािपारिक सदस्योंा के दिवालियापन की सूरत में संगत वित्तीय संविदाओं को दिवालियापन के कानूनों के सामान्यद प्रचालन से छूट मिल जाती है;

• बीएलआरसी नोट करती है कि अधिकतर सूक्ष्मे, लघु और मध्यकम उद्यम (''एमएसएमई'') के दिवालियापन का समाधान व्यलक्तिघगत दिवालियापन कानूनों पर आश्रित है (जो व्य वहार में बहुत निष्र्ानभावी साबित हुए हैं) और यह समिति वित्तीएय तंगहाली में चल रहे अर्थक्षम सूक्ष्म , लघु और मध्यवम उद्यमों को पुन: कार्यक्षम बनाने के लिए प्रशासनिक तंत्र का प्रस्ता व करती है और यह अनुशंसा करती है कि इसे सांविधिक दर्जा दिया जाए। कारगर ढंग से कार्यान्विीत किए जाने पर यह प्रस्तादवित तंत्र, प्रशासकों और अदालतों/अधिकरणों वाले औपचारिक बचाव तंत्रों से जुड़ी बड़ी लागतों से हटकर वित्तीऔय तंगहाली में चल रहे अर्थक्षम सूक्ष्मत, लघु और मध्यसम उद्यमों को बहुत जरूरी राहत प्रदान करेगा। ऐसा प्रशासनिक ढांचा दिवालियापन संहिता के प्रचालन के पश्चायत भी उपयोगी होगा।

हम दिवालियापन कानून संशोधन समिति की अंतरिम रिपोर्ट पर आपके सुझाव और टिप्पणियां आमंत्रित करते हैं।

दिवालियापन कानून संशोधन समिति की अंतरिम रिपोर्ट: http://cdn.mygov.nic.in/bundles/frontendgeneral/images/Interim-Report-of-the-BLRC.pdf

आप अपनी टिप्पणियां 20 फ़रवरी 2015 तक भेज सकते हैं।

फिर से कायम कर देना
159 सबमिशन दिखा रहा है
prashant mishra
prashant mishra 11 साल 4 महीने पहले
Dear Sir, In our country income tax is collected based on entity criteria i.e. individual and corporate. But would request you to please consider sole earners of a family as different category (or additional tax rebate can be granted) as they are not same as individuals. Sole earners of household has additional responsibilities of running their family. Even in US there are separate taxation rules for sole earners. I would request you please consider this in current budget preparation exercise.
Shirish Babtiwale
Shirish Babtiwale 11 साल 4 महीने पहले
I believe, MyGov is a great initiative taken under the aegis of Hon'ble PM Narendra Modiji. I am working in education & training sector and currently promoting ERP (IT) training and ERP software products. The sector offers excellent opportunity for skill and career development. Those interested to know more can contact me on 9423686993 or write to me on my gmail ID shirishsmb.
RAMESH NS
RAMESH NS 11 साल 4 महीने पहले
There is NO CENTRAL REPOSITORY for banks to find the defaulters list/people of bank loans. The person applies loan across different banks and defaults on all banks still the person gets loan from other bank due to fudging of records and window dressing. Till date I haven't heard any actions on CAs whether its SATYAM/UB/DECCAN. all go absconding and will be in hospitals till they get bail..There is no strong RISK MANAGEMENT PROCESS IN THE PSU ENTITIES and there is lot of pressure from politicians
Madhu Kumar
Madhu Kumar 11 साल 4 महीने पहले
Nationalized Banks give large credits to Corporate companies with out sufficient security.This cause irrecoverable bad debt.It also affects credibility of Indian Banking System.The risk involved in it shall not be left unseen.Priority based soft loans shall be given to small and medium scale entrepreneurs. Educational loans shall be made free from interest in all deserving cases.Interest if any on such loans shall not be compounded.Education is an investment of high order.
VAIBHAV GUNJAL
VAIBHAV GUNJAL 11 साल 4 महीने पहले
SURPRISINGLY, THERE IS NO SPECIAL PORTAL PROVIDED HERE IN mygobv.in FOR "AGRICULTURE IN INDIA" FROM LAST 9 MONTHS, GOVT. HAS BEEN VERY INSENSITIVE TOWARDS THIS SECTOR, IF ANYONE READS THESE SUGGESTIONS PLEASE LOOK INTO IT ALSO.. I AM A FARMER AND NEED TO BE LESSONED BY GOVT. REPLY TO THIS PLEASE.
brajesh kumar
brajesh kumar 11 साल 4 महीने पहले
For improving education in govt. schools we can attract youth by giving them income on daily hours basis for teaching in govt school to any person who can teach. This will help in improving quality of education & same time help them to get pocket money for useful work like buying book,stationary for themselves .
Prakash Deshpande
Prakash Deshpande 11 साल 4 महीने पहले
स्वाइन फ्लू के फैलाव को रोकने के लिए हमें फिर से ज्यादा सफाई की ओर ही ध्यान देना होगा. प्रतिवर्ष कोई न कोई बीमारी जरुर फैलती है किसी विशेष तापक्रम आद्रता इत्यादि में कोई एक बीमारी जोर पकड़ लेती है बरसात के बाद से अक्सर बीमारियाँ फैलती है जिनका असर अप्रैल तक रहता है इन सभी तथ्यों पर ध्यान देने ओर सभी सरकारों द्वारा समय से पहले कदम उठाने की जरुरत है ज्यादातर कितानुजन्य बिमारिओ के शमन में सफाई एवं सावधानी एक बहुत आवक्श्यक है ओर कारगर भी स्वच्छ भारत अभियान जोर से चलाये इलाज पर खर्च न होगा