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निजी क्षेत्र के साथ सार्थक भागीदारी

Meaningful partnership with the private sector
आरंभ करने की तिथि :
Jan 22, 2015
अंतिम तिथि :
Nov 01, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

उच्चतर शिक्षा केवल सार्वजनिक वित्तपोषण से ही चिरस्थायी नहीं रखी जा ...

उच्चतर शिक्षा केवल सार्वजनिक वित्तपोषण से ही चिरस्थायी नहीं रखी जा सकती। हालांकि, उच्चतर शिक्षा में सार्वजनिक निजी भागीदारी को एक कार्यनीति के रूप में अपनाया गया है फिर भी बहुतों के सफल परिणाम सामने नहीं आए हैं। अत: पीपीपी मॉडलों को संशोधित करने की आवश्यकता है जिसमें अधिक सार्थक सहयोग की गुंजाइश हो। उच्चतर शिक्षा में पीपीपी का आलोचनात्मक विश्लेषण, मौजूदा विधिक उपबंध और सम्भाव्य मॉडल लागू करने की आवश्यकता है।

फिर से कायम कर देना
570 सबमिशन दिखा रहा है
Ashish Shrivastava
Ashish Shrivastava 11 साल 1 महीना पहले
शिक्षा एक व्यपार की तरह हो गई है इसको रोकने के लिए सरकार को निजी छेत्र के लोगो के साथ मिलकर स्कूल एवं कॉलेज खोलने चाहिए जिनमे कम फीस पर उच्च श्रेणी की शिक्षा प्रदाय हो सके एवं गरीब और मध्यमवर्गीय लोगो को रहत मिल सकेगी साथ ही इन शिक्षा व्यापारियों से टैक्स वसूलकर शासकीय संस्थाओ को बढ़ावा देना चाहिए.
AMIT MAKKER
AMIT MAKKER 11 साल 1 महीना पहले
acc to my view, that the govt. should joined there hands with private schooling and make the all india school standards at on level so that a student can know the level of their own. the investment that govt done on higher salaries of around 1 lakh but with poor management private sector can handle it with a good skills . NO teacher is permanent or temporary , it acc to its perfoamnce , subsidy will provided to only economicaly poor or outstanding students. all students can play on same platform