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मुंबई शहर के लिए प्रस्तावित पार्किंग संबंधी नीति हेतु सुझाव आमंत्रित

आरंभ करने की तिथि :
Sep 19, 2014
अंतिम तिथि :
Sep 30, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
अद्भुत नगरी मुंबई 12 लाख लोगों का घर होने के साथ-साथ देश की वित्तीय ...
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sree DEBASISH DASGUPTA
11 साल 5 महीने पहले
माननीय-प्रधानमन्र्ती
एक गरीब परिबार को शिर्फ जीने के लिये खरचा केतना प्रधानमन्र्ती को बोलने का मौका मिला-इसलिये लिखरा हु- मकान के किरया+बिजली-2000/-(1रुम,बारन्दा-4 जन),मुदि दुकान-1900/-,चाल आटा-500/-दो सन्तान के टिउशन-(3टीचर+जानेआने के किराय)1800/-400/-,गेस 400/-,सबजी (15/-प्रोतिजन 4*15*30दिन)1800/-,द्वा 500/-कुल 9300/माहिना-इसमे नेहि है“दुध”पेन,कपि,”किताब”कापरा”टिभि.नाच-गाना-दुसराकोहि भि आनन्द-हासना,शिर्फ जीना,आय-मुशकिल से 150-200/=6000/-से क्म.बजट मे क्रिपाकरके समान के किमत पे नेहि तो आय कि
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Dhananjay Devasper
11 साल 5 महीने पहले
The initiative cannot be a money making racket. The charges are too high and if you are taking money you should provide security and not depend on the watchmen of the societies to take turns. Scrap the policy
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sree DEBASISH DASGUPTA
11 साल 5 महीने पहले
आय के स्रोत पे जोर दिजिये...नेहि तो हर रोज क्रोर भिखारि बानेगा,आगे कि स्ररकार सिर्फ आपना आपना प्रोसनसा हि सुननेका आदत डाला था..आगर हकिकत जानने कि कोशिस करता तो 26/-इनकाम बाले APL अर 5/-भरपेत थालि बोलता नेहि..जिसकि फल उहि आज भुगतरा साथ मे हुम भि.. आप जब हामारा बात जानने कि रुचि राखते है तो लिखने के दिल हुया...(माननीय--अफिसर क्रिपा कर के मेरा एहि अनुरोध पि.एम तक देने से हम धन्न्य होंगे..)
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sree DEBASISH DASGUPTA
11 साल 5 महीने पहले
माननीय-प्रधानमन्र्ती
एक गरीब परिबार को शिर्फ जीने के लिये खरचा केतना प्रधानमन्र्ती को बोलने का मौका मिला-इसलिये लिखरा हु- मकान के किरया+बिजली-2000/-(1रुम,बारन्दा-4 जन),मुदि दुकान-1900/-,चाल आटा-500/-दो सन्तान के टिउशन-(3टीचर+जानेआने के किराय)1800/-400/-,गेस 400/-,सबजी (15/-प्रोतिजन 4*15*30दिन)1800/-,द्वा 500/-कुल 9300/माहिना-इसमे नेहि है“दुध”पेन,कपि,”किताब”कापरा”टिभि.नाच-गाना-दुसराकोहि भि आनन्द-हासना,शिर्फ जीना,आय-मुशकिल से 150-200/=6000/-से क्म.बजट मे क्रिपाकरके समान के किमत पे नेहि तो आय कि
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Surendra mishra
11 साल 5 महीने पहले
Ek idia aur hai mumbai ki parking k liye hum log road k dino side pr parking track bana sakte jaha pr aj kal foot track banaye jate hai waha pr road ki chodi kr parking track bana sakte hai
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Surendra mishra
11 साल 5 महीने पहले
Mera suggedtion hai ki mubai mai railway k paas kafi land hai ager hum us mai se railway k track k dono taraf 10-10 foot ka track banaye aur usko parking k liye use kare to esse railway ko fayada hoga aur goverment ko bhi msi delhta hoon railway patryo k dono taraf kafi jamin hai jo.useless hai use parking k pryog mai ek sadak jaisi track bana kr upyog.mai layi ja sakti hai jab kabh railway ko.jarurat ho.to woh track ko spne use mai la sakti hai
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Sanjeev Goel
11 साल 5 महीने पहले
मोदी जी,
दिल्ली में AAP ने विधानसभा की तैयारी बहुत पहले से ही दिल्ली की जरुरत के हिसाब से शुरू कर दी थी वहीं दूसरी ओर BJP केवल मोदी लहर के नाम पर जीत हासिल करने के सपने बुन रही थी। AAP के पास कोई विकास का एजेंडा नहीं है फिर भी वो लोगो को लुभाने में सफल हो रही है। वही BJP के पास न तो दिल्ली के लिए कोई विकास का एजेंडा है ना ही आकर्षक योजनाएं। ऊपर से BJP की आतंरिक कलह का लाभ भी विरोधी उठा रहे है। दिल्ली BJP मौका परस्त कार्यकर्ताओं का अड्डा बन गयी है जिसमे सभी CM बनाना चाहते है पर मेहनत कोई नहीं।
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Bipin Shah
11 साल 5 महीने पहले
Dear Sir,
I am in the business of export. Sir the goverment give refund of service tax paid by exporter. There is to much documents required for this prosess. My suggestion to this is just abolish the service tax from services provided to expoters
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Sanjeev Goel
11 साल 5 महीने पहले
मोदी जी,
अगर दिल्ली BJP में एकता और निस्वार्थ जन-सेवा की भावना होती तो विधानसभा में स्थिति इतनी विकट नहीं होती। केजरीवाल की गलतियों को भी लोग माफ़ करना चाहते है क्योंकि वो सपने दिखा रहा है परंतु दिल्ली BJP के पास कोई कोई विज़न नहीं है। पिछली बार BJP ने 30% बिजली बिल कम करने का वादा किया था परंतु इस बार बिजली दर कम करने की कोई बात सामने नहीं आई जिसका फायदा AAP को मिल रहा है। बिजली कंपनियों के लाभ के बारे ना सोच कर जनता के हितों का अधिक ध्यान रखना होगा। ऐसे बहुत से मुद्दे है जिन पर ध्यान देना होगा।
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dr shiv shankar yadav
11 साल 5 महीने पहले
Why we don't follow law. Why we don't follow graphic rules. Why we are keeping our city dirty. Why we don't believe in our system.
It very difficult but becomes simple if we fix our responsibility. If only give free hand to our implementation agency and punish them for there wrong doing things will change fast. But will give them free hand for there job and who will punish them for there wrong doing. Very difficult but possible. Its in the hand of our dear politician. They have to be blamed.
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