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रक्षा क्षेत्र में बजट पहलों के क्रियान्वयन के लिए विचारों का आमंत्रण

आरंभ करने की तिथि :
Feb 22, 2021
अंतिम तिथि :
Mar 31, 2021
23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

हाल ही में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने रक्षा क्षेत्र ...

हाल ही में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने रक्षा क्षेत्र में केंद्रीय बजट प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन पर वेबिनार को संबोधित किया है। अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि वेबिनार का बहुत महत्व है क्योंकि यह देश के रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के महत्वपूर्ण मुद्दे पर केंद्रित था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश में जो रक्षा गलियारे बनाए जा रहे हैं, वे स्थानीय उद्यमियों और स्थानीय विनिर्माण में भी मदद करेंगे। आज हमारे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को - "जवान और साथ ही युवा" इन दो मोर्चों के सशक्तिकरण के रूप में देखा जाना चाहिए।

रक्षा क्षेत्र से संबंधित केंद्रीय बजट में प्रमुख घोषणाएं इस प्रकार हैं और हम जनता और अन्य हितधारकों से विचार और सुझाव आमंत्रित कर रहे है-
• रक्षा में पूंजी परिव्यय के लिए बजटीय व्यय में लगभग 19% की वृद्धि हुई। यह 15 साल में सर्वाधिक है।
• निजी निवेशकों के लिए अवसरों को बढ़ाने के लिए इस क्षेत्र में विनिवेश।
• सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों द्वारा (रक्षा मंत्रालय के तहत) हवाई जहाजों और इसके किसी हिस्से निर्माण के लिए पुर्जों के आयात पर सीमा शुल्क की दरों को कम कर नगण्य करना।

भेजने की अंतिम तिथि 31 मार्च 2021 है

फिर से कायम कर देना
1199 सबमिशन दिखा रहा है
NAVIN CHANDRA PATHAK
NAVIN CHANDRA PATHAK 5 साल 2 महीने पहले
देश की रक्षा क्षेत्र की प्रतिष्ठानों का निजीकरण नहीं करना चाहिए उस पर पूर्ण मालिकाना हक सरकार का ही होना चाहिए क्योंकि देश की सुरक्षा सर्वोपरि है |
NAVIN CHANDRA PATHAK
NAVIN CHANDRA PATHAK 5 साल 2 महीने पहले
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता देश के जवान और युवा के सशक्तिकरण में सहायक होगा और प्रत्यक्ष रूप से ये दोनों देश की रक्षा एवं उसके विकास में अपना अहम योगदान देंगे |
NAVIN CHANDRA PATHAK
NAVIN CHANDRA PATHAK 5 साल 2 महीने पहले
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को देश के जवान और युवा के सशक्तिकरण में सहायक होगा और प्रत्यक्ष रूप से ये दोनों देश की रक्षा एवं उसके विकास में अपना अहम योगदान देंगे |
Dr  Mohanji Vajaji Rangi
Dr Mohanji Vajaji Rangi 5 साल 2 महीने पहले
Jai Bharat mata ki jawano ko Raksha me na ave kavash pradan karana chaiye taki uni Jan Bach jaye acha bhojan shansamagari dene chaiye desh ki bodarpar seva de rahe unko full shut Deni chaiye ki desh ka dusman dikaye de turat use udadena ka adesh dena chaiye Kohi bhi dadavae me nahi avave jawano ko rahene ke liye jamin de khet de full medical seva vobhi pravet hospital de Vo bhi free me Parihar Raksha karene ke yogiye Ka
NUKALA PURNA CHANDRA REDDY
NUKALA PURNA CHANDRA REDDY 5 साल 2 महीने पहले
एक आम नागरिक बोल रहा हूं पहले से ही भारत में पेट्रोल के दाम बढ़ने से आम नागरिक परेशान है जिससे कि भारत में वस्तुओं की दाम बढ़ गया है तथा विभिन्न क्षेत्रों का निजीकरण करने से अन्य सेवाओं भी महंगी हो गई है जैसे कि रेलवे का प्लेटफार्म अब 50 में मिलता है बैंकिंग सेवाएं भी निजीकरण के कारण महंगी हो जाएंगी वैसे ही जीवन जीना मुश्किल था अब निजीकरण के कारण और महंगी हो जाएंगी कोरना काल में वैसे ही परेशानी अधिक है निजी करण के कारण शिक्षा स्वास्थ्य रेलवे तथा बैंकिंग सेवाएं महंगी जाएंगे,लोकतंत्र हित नहीं
chandan kumar singh
chandan kumar singh 5 साल 2 महीने पहले
मैं एक आम नागरिक बोल रहा हूं पहले से ही भारत में पेट्रोल के दाम बढ़ने से आम नागरिक परेशान है जिससे कि भारत में वस्तुओं की दाम बढ़ गया है तथा विभिन्न क्षेत्रों का निजीकरण करने से अन्य सेवाओं भी महंगी हो गई है जैसे कि रेलवे का प्लेटफार्म अब 50 में मिलता है बैंकिंग सेवाएं भी निजीकरण के कारण महंगी हो जाएंगी वैसे ही जीवन जीना मुश्किल था अब निजीकरण के कारण और महंगी हो जाएंगी कोरना काल में वैसे ही परेशानी अधिक है निजी करण के कारण शिक्षा स्वास्थ्य रेलवे तथा बैंकिंग सेवाएं महंगी जाएंगे,लोकतंत्र हित नहीं
chandan kumar singh
chandan kumar singh 5 साल 2 महीने पहले
मेरे विचार से बैंकों का निजीकरण ना करके विलय कर देना चाहिए क्योंकि जो आर्थिक व्यवस्था देश में है उसको बहुत बड़ा नुकसान होगा लोगों का बैंकिंग व्यवस्था के प्रति तटस्था हो जाएगी सरकार का दायित्व है वह इन आर्थिक व्यवस्थाओं की रक्षा करें विलय उपरांत सरकार आम जनता तथा कर्मचारी की रक्षा सुनिश्चित होगी तथा लोगों का सरकार पर विश्वास बढ़ेगा नहीं तो साहूकारिता की ओर भारत अग्रसर होगा निजी करण से बैंकिंग सुविधा महंगी हो जाएंगी और सरकार का जनता पर अपना कंट्रोल कम हो जाएगा इसलिए सरकार बैंकों का विलय करना चाह