Home | MyGov

Accessibility
ऐक्सेसिबिलिटी टूल
कलर एडजस्टमेंट
टेक्स्ट साइज़
नेविगेशन एडजस्टमेंट

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2016 के प्रारुप संबंधी सूचना

Inputs on Draft National Education Policy 2016
आरंभ करने की तिथि :
Jun 29, 2016
अंतिम तिथि :
Oct 01, 2016
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति ...

भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2016 के प्रारुप संबंधी सूचना साझा की है। इससे संबंधित नागरिकों से सलाह और विचार आमंत्रित हैं। आप अपनी सलाह और विचार nep.edu@gov.in (मेल करने के लिए लिंक पर क्लिक करें) पर या नीचे दिए कमेंट बॉक्स के जरिए भी भेज सकते हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2016 के प्रारुप संबंधी विचार या सलाह भेजने की आखिरी तिथि 31 जुलाई, 2016 है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2016 का प्रारुप

फिर से कायम कर देना
5927 सबमिशन दिखा रहा है
Prashant Agarwal
Prashant Agarwal 9 साल 8 महीने पहले
एक बार मैं कक्षा में बुद्ध को quote कर रहा था कि उन्होंने अपने पुत्र राहुल से कहा था "मज़ाक में भी झूठ मत बोलो।" इस पर एक छात्र, जो बहुत कम बोलता था, उठकर बोला, "सर! मज़ाक में तो झूठ ही बोला जाता है।" उसके प्रत्युत्तर से मैं भी सोच में पड़ गया और अंततः पाया कि अपवादों को छोड़कर उसकी बात सच थी। यदि सत्यवक्ता के ओज और प्रभाव पर विचार करें तो क्या हम शिक्षक इस कसौटी पर खरा उतरने का प्रयास करते हैं, क्योंकि शिक्षक का दायित्व वाकई अत्यंत गुरुतर है।
Prashant Agarwal
Prashant Agarwal 9 साल 8 महीने पहले
कहीं पढ़ा कि "अमेरिका का झंडा एक school project के लिए 17 साल के बच्चे ने डिज़ाइन किया था जिसमें उसको सिर्फ B- मिला।" सोचता हूँ कि '3 इडियट्स' फिल्म को तालियाँ तो खूब मिलीं लेकिन फिल्म के सन्देश पर क्या कोई अमल हुआ? क्या हमारी शिक्षा प्रणाली का मशीनीपन, उसकी नीरसता, उसकी जड़ता पर कोई सार्थक चोट हुई? या फिर हम जड़ पर प्रहार न करके बस छोटे मोटे परिवर्तनों से ही संतुष्ट होने क तैयार हैं? रचनात्मकता और नैतिकता को प्रोत्साहित किये बिना सारी शिक्षा सिर्फ आत्माविहीन देह ही कही जा सकती है।
N.M.MASOODHU BANU
N.M.MASOODHU BANU 9 साल 8 महीने पहले
+1 and +2 system of education has to be reformed , as it tests only the students memory power. Student has to write exactly what is in book without changing any sentence. For professional courses entrance exams has to be conducted. Good quality of teachers have to be recruited in educational Institutions. Salary package should be good.
Prashant Agarwal
Prashant Agarwal 9 साल 8 महीने पहले
एक पुस्तक 'तोत्तो चान', जो हर व्यक्ति विशेषकर हर शिक्षक को पढ़नी चाहिए। कुछ विशेषताएं : 1. पुस्तक दुनिया की bestsellers में रही है। 2. पुस्तक सच्ची घटना पर आधारित है। 3. पुस्तक जापान में एक व्यक्ति (कोबायाशी) द्वारा चलाये गये एक प्रयोगात्मक स्कूल का रोचक और मार्मिक चित्रण है। 4. पुस्तक में मनोविज्ञान के अनेक सूत्रों का व्यवहारिक चित्रण है। 5. पुस्तक की लेखिका स्वयं इस स्कूल की नन्हीं छात्रा थी और स्कूल के हेडमास्टर के साथ पुस्तक की केन्द्रीय पात्र है। कुल मिलाकर अवश्य पढ़ने योग्य
Prashant Agarwal
Prashant Agarwal 9 साल 8 महीने पहले
"केवल एक चीज जो मुझे सीखने में हस्तक्षेप करती है वो है मेरी शिक्षा।"~ अल्बर्ट आइन्स्टीन (उक्त वक्तव्य संभवतः वर्तमान शिक्षा प्रणाली की बोझिलता, अव्यावहारिकता और अवैज्ञानिकता पर कटाक्ष है)
Prashant Agarwal
Prashant Agarwal 9 साल 8 महीने पहले
"जो कुछ भी हमने स्कूल में सीखा है, वो सब भूल जाने के बाद भी जो हमें याद रहता है, वो ही हमारी शिक्षा है।"~अल्बर्ट आइंस्टीन
Prashant Agarwal
Prashant Agarwal 9 साल 8 महीने पहले
(For teachers) # Tell me and I forget. Show me and I remember. Involve me and I learn. (Benjamin Franklin) # A teacher who is attempting to teach without inspiring the pupil with a desire to learn is 'hammering on cold iron'. (Horace Mann) # (kids) don't remember what you try to teach them. They remember what you are. (Jim Henson) # It is not what is poured into a student that counts but what is planted. (Linda Conway)