javedkatni
9 साल 8 महीने पहले
स्कूल मे बच्चों के बस्तों का बोझ बढ़ता ही जा रहा है। इसके साथ ही अच्छे पब्लिक स्कूल की फीस भी....
गरीब बच्चों के लिये मुसीबत ही है.......क्योकि ज्यादातर सरकारी स्कूलों की पढ़ाई अच्छी नही है......इसके साथ ही बच्चो को हिन्दी, अंग्रेजी के साथ ही संस्कृत भी पढ़ना होता है एैसे मे बच्चों के दिमाग पर बोझ पड़ता है और किसी एक ओर ध्यान केन्द्रित नही कर पाते......इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है.....
- जावेद अहमद
कटनी (म.प्र.)
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