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सूचना उपयोग के लिए नियमों के मसौदे पर सार्वजनिक परामर्श

Public Consultation on Draft Regulations for Information Utilities
आरंभ करने की तिथि :
Jan 19, 2017
अंतिम तिथि :
Feb 08, 2017
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड का गठन 01 अक्तूबर, 2016 को दिवाला और ...

भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड का गठन 01 अक्तूबर, 2016 को दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 के प्रावधानों के अनुसार किया गया था।

बोर्ड का दायित्व भारत में दिवाला और शोधन अक्षमता शासन के कार्यान्वयन हेतु एक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र की स्थापना से है। इसमें निम्नलिखित व्यापक कार्य शामिल हैं:

• कॉर्पोरेट दिवाला, कॉर्पोरेट परिसमापन, व्यक्तिगत दिवाला, और व्यक्तिगत शोधन अक्षमता से संबंधित विनियमन और बाजार प्रक्रियाओं पर पद्धतियों का विकास
• दिवाला प्रक्रिया के लिए सेवा प्रदाताओं का पंजीकरण और विनियमन जिसमें दिवाला व्यवसायी (आईपी), दिवाला व्यवसायिक एजेंसियां (आईपीए) और सूचना उपयोगिताएं (आईयू) शामिल हैं।
• निरीक्षण, जांच और शिकायत निवारण के जरिये बाजार और सेवा प्रदाताओं पर निगरानी।
• सेवा प्रदाताओं का प्रवर्तन और अधिनिर्णयन जिससे उनकी सुव्यवस्थित कार्यप्रणाली सुनिश्चित की जा सके।
• शिक्षा, परीक्षा, प्रशिक्षण और सतत व्यवसायिक विकास के द्वारा व्यवसायिक विकास और विशेषज्ञता

कॉर्पोरेट मामले के मंत्रालय ने बोर्ड को प्रारंभिक मार्गदर्शन और सहयोग दिया है। इसने चार कार्यकारी समूह का गठन किया, जिसका कार्यकाल एक निश्चित अवधि का होगा।

इन कार्यकारी समूहों को निम्न अधिकार दिए गए हैं।
1. बोर्ड के संगठनात्मक ढांचे हेतु विचार करने व अनुशंसा करने,
2. दिवाला व्यवसायियों, दिवाला व्यावसायिक एजेंसियों व अन्य मामले से संबंधित नियम और विनियमन।
3. संहिता के मुताबिक दिवाला और समापन प्रक्रिया से संबंधित मामले व अन्य मामले से संबंधित नियम बनाने ।
4. संहिता के अंतर्गत सूचना उपयोगिताओं से संबंधित व अन्य मामलों पर नियम बनाना।

इन कार्यकारी दलों ने कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय को दिवाला व्यवसायिक एजेंसियां, दिवाला व्यवसायियों के लिए नियमों व उपनियमों, कॉर्पोरेट व्यक्तियों के लिए दिवाला समाधान, दिवाला समापन प्रक्रिया के प्रारूप व नियम तैयार करने में मदद की। कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय ने इन नियमों के प्रारूप पर जनता की टिप्पणियों के लिए 28/31 अक्तूबर, 2016 तक पब्लिक डोमेन में रखा है।

कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय द्वारा चार कार्यकारी समूह का गठन नियमों, विनियमनों और सूचना उपयोगिताओं से संबंधित मामलों पर दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 के अन्तर्गत विचारपूर्वक अपनी अनुशंसाएं प्रस्तुत करने हेतु किया गया था। कार्यकारी समूह द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट एतदद्वारा संलग्न है। इस रिपोर्ट में सूचना उपयोगिताओं पर नियमों का प्रारुप भी शामिल है।

भारतीय दिवाला और धन शोधन अक्षमता बोर्ड जनता से रिपोर्ट और नियमों के प्रारुप के प्रत्येक प्रावधान पर 7 फरवरी, 2017 तक टिप्पणियां आमंत्रित करता है।
रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

फिर से कायम कर देना
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Mahesh Agrawal
Mahesh Agrawal 9 साल 4 महीने पहले
hon'ble PM, 1 .In all the job in India people get the gratuity after 5 years working. But in Lic of India the Agents get the gratuity benefits after working 15 years.please can you do something. 2. when one beti get the benefit of father property and husband property/legal father in law property.Then Beti should get the preference optional in the Aadhar card to give both the address after marriage.
SHIVAPRASAD S
SHIVAPRASAD S 9 साल 4 महीने पहले
The PDF attachment involves the simplest and most effective strategy that immediately caters to the current economic crisis in the country due to demonetization, tailored mainly to address worst affected classes of society which solely depend on daily transactions and daily income.Since, this is related to RBI reforms in collaboration with Ministry of Finance & the banking sector, I am sharing it here, and I kindly request to share the information to concerned authorities with extra interest!
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