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3 अक्टूबर 2014 को सुबह11 बजे प्रधानमंत्री रेडियो के माध्यम से राष्ट्र को संबोधित करेंगे

PM on Radio on 3rd October 2014 at 11:00 AM
आरंभ करने की तिथि :
Jan 01, 2015
अंतिम तिथि :
Nov 03, 2014
04:15 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

3 अक्टूबर 2014 को विजय दशमी के पावन अवसर पर सुबह11 बजे प्रधानमंत्री ...

3 अक्टूबर 2014 को विजय दशमी के पावन अवसर पर सुबह11 बजे प्रधानमंत्री रेडियो के माध्यम से राष्ट्र को संबोधित करेंगे। माननीय प्रधानमंत्री द्वारा फिर से देश के लोगो से जुड़ने के लिए एक अलग प्रयास किया गया है। प्रधानमंत्री यहाँ अपने मन की बातें(बातें मन की) साझा करेंगे।

यह फोरम आपको उन महत्वपूर्ण मुद्दों के लिए सुझाव देने के लिए आमंत्रित करता है जिनके बारे में आप प्रधानमंत्री के विचार जानना चाहते हैं।

फिर से कायम कर देना
1430 सबमिशन दिखा रहा है
NEERAJ PRAKASH
NEERAJ PRAKASH 11 साल 8 महीने पहले
"Charity begins at home.." In order to start cleanliness, I want to establish something for my region to better manage home waste. I want to enable a process of separating organic and inorganic waste in order to stop dumping some good Eco-friendly minerals which can be used for manure etc. Any suggestions how can I inspire and establish such a thing. Or if the municipal corporations already have any such scheme which we can leverage ? Thanks
sunkara sree rohita swathi
sunkara sree rohita swathi 11 साल 8 महीने पहले
'खुद कॊ समझऩे का सबसे अचछा तरीका है दूसरॊं की सेवा मे खुद कॊ मिटा दॆना ' . . . . . . वैशणव जन तॊ तेने कहिए जे पीर पराई जाणे रे......... . 'हर काम की एक अपनी गरिमा है, और हर काम कॊ अपनी पूरी कशमता सॆ करने मे ही संतोश मिलता है '। . . . JAI HIND :)
jitendra suthar
jitendra suthar 11 साल 8 महीने पहले
अगर हमारा प्रथम उदेश्य स्वच्छ और शुद्ध भारत है तो, अब समय आ गया हौ कि हम हाइड्रोजन को एक ईंधन के रूप मे प्रयोग करते हुए फ्युल सेल का प्रत्येक क्षेत्र मे प्रोयग बढ़ाए और इसके लिए एक विश्वविद्यालय की घोषणा की जा सकती है, जिससे इसके ऊपर अनुसंधान को बढ़ावा मिले । साथ ही इस टेक्नालजी को इतने व्यापक रूप मे बढ़ाया जाए की यह बहुत सस्ती और सुरक्षित हो। एक सरकारी निगम की भी स्थापना की जा सकती है। जिससे इसके प्रयोग को जनसाधारण मे प्रचलित किया जा सके और जागरूकता बढ़े। जितेंद्र सुथार