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Inviting suggestions on the draft National Electricity Policy (NEP) 2021

आरंभ करने की तिथि :
May 03, 2021
अंतिम तिथि :
May 15, 2021
23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
Under Section 3 (3) of the Electricity Act, 2003, the Central Government may, from time to time, in consultation with the State Governments and the Central Electricity Authority, ...
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SINGH RAJESH
5 साल 1 महीना पहले
SIR, THE OTHER FATORS ARE MODERNIZATION OF MACHINERY THROUGH SPARES THIS WILL ALSO BRINGS EFFICIENCY, FASTER POWER SUPPLY AND SAVE THE COST ALSO THIS WILL BRING EASE OF REACH TO EVERY. COMPANY ALSO ADAPT TO NEW TECHNOLOGY REQUIRED BY INDUSTRY 4.0 AND MSME AND STARTUS.
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NARAYAN ADHIKARI
5 साल 1 महीना पहले
electric energy is very necessary in daily life . so it should save and take more appropriate measures to move forward .
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SINGH RAJESH
5 साल 1 महीना पहले
SIR, GE, ENCLOSED SUGGESTION FROM MY SIDE ABOUT NATIONAL ELECTRICITY POLICY 2021. THANKS.
mygov_162047438558896681.pdf
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Shanta Srivastava
5 साल 1 महीना पहले
करने के लिये सुझाव है कि पूरे देश में एक रेट पर मोबाइल चार्जिंग व प्रीपेड व्यवस्था लागू करे एक ऐसी व्यवस्था हो हम पहले शुल्क बिजली की कीमत देकर आवश्यक्तानुसार बिजली लें ताकि बिजली का दुरूपयोग से हम बचेंगे लोग बिजली बचाने के प्रति जागरूक रहेंगे साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में हर न्याय पंचायत अथवा ग्राम पंचायत स्तर पर विद्युत मिनी प्लान्ट व सौर ऊर्जा केन्द्र स्थापित किये जायें जिससे अपनी क्षमतानुसार लोग बिजली ले सकें! बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा की व्यवस्था स्वच्छ, स्वस्थ व आत्मनिर्भर भारत के निर्माण मे
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Shanta Srivastava
5 साल 1 महीना पहले
वाहनों का सडक पर दौड़ना, गुटका खाकर जगह जगह थूकना आदि आदि हर तरीके से हम पर्यावरण को नुकसान ही पहुँचा रहे हैं जिसका नतीजा है पूरा विश्व "कोरोना" संकट से जूझ रहा है आज घर घर में फ्रीज, पंखा, कूलर, ए.सी. हीटर, माइक्रोवेव, टी,वी, मोबाइल, इलेक्ट्रिक बाइक, पानी मोटर आदि आदि तमाम संसाथनों के लिये हर घर में बिजली की खपत में दोगुनी तीगुनी वृद्धि हुई है और इतनी बिजली हर परिवार को बिजली की बढती माँग को पूरा करने के लिये सरकार को बडे पैमाने पर बिजली उत्पादन करना है इसके लिये सरकार NEP 2021 का प्रारूप तैयार
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Ashish Jindal
5 साल 1 महीना पहले
give more focus on solar power operated street lamps and general electronic equipment used to manage traffic on roads, even use solar power plants in all the government offices and in residential building of officials. further give focus to promote wind energy or hydro power projects.
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Shanta Srivastava
5 साल 1 महीना पहले
है! कहते हैं हम जैसा बोयेंगे वैसा ही काटेंगे! आज इस आधुनिकता के फैशन में हम स्वयं को हाई क्लास व फारवर्ड बनने के चक्कर में अधिक से अधिक धन कमाने अपनी भाषा शैली से लेकर रहन सहन सभी में बदलाव लाकर अपनी पुरानी सभ्यता, संस्कृति को बहुत पीछे छोड़ वही कर रहे रहे हैं जो स्वयं के लिये गलत तो है ही पूरा पर्यावरण असंतुलित है बढ़ती जनसंख्या, पॉलीथीन का अन्धाधुन्ध प्रयोग, कल कारखानों के विषैले धुँआ, गाँव-गाँव में अवैध कच्ची शराब भठ्ठियों का धुँआ, पेड़ों का अन्धाधुन्ध कटान, बड़ी संख्या में बाइक व चार पहिया
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Brijesh
5 साल 1 महीना पहले
we should concentrate more in manufacturing solar panels with low cost and high efficiency . our government should manufacture it and make them available for all people . this helps us to reduce the number of thermal and nuclear power plant . and this also helps us to provide job for many people . salary and management should be managed by private peoples and they can be selected from organizations such as RSS to ensure that they were honest .but government should earn a net profit.
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NANDAN SHERLEKAR
5 साल 1 महीना पहले
Contd---This has to be done state & escomwise.The entire data has to be on computers with GPS location of every poll, transformers upto utility point.Once a proto type Project for a particular region is done scientifically with all the data losses could be controlled.Every generation point linked with satallite link or optic fibre cables to a centralised Control desk in a particular region. This type of analysis can create employment, wastages due to deep study of transmission losses.
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Shanta Srivastava
5 साल 1 महीना पहले
आज पूरा विश्व "कोरोना" महामारी से जूझ रहा है इसके लिये कहीं न कहीं हम स्वयं जिम्मेदार हैं आज ईश्वर ने प्रकृति के रूप में सब कुछ दिया है! शुद्ध ताजी हवा, पानी, हरे भरे पेड़ पौधे, फल-फूल, नदियाँ, पहाड़, झरने, समुद्र, तीर्थ स्थल आदि आदि पर हम प्रकृति को क्या दे रहे हैं बल्कि जो कुछ हमें ईश्वर ने दिया है हम उसकी सुरक्षा भी नहीं कर पा रहे बल्कि किसी न किसी रूप में हम प्रकृति को नुकसान ही पहुँचा रहे हैं आज पृथ्वी भी हमारा भार सहने में अक्षम है चारो तरफ वातावरण प्रदूषित है जिसका परिणाम हम सभी के सामने
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