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आरंभ करने की तिथि :
Mar 12, 2020
अंतिम तिथि :
Nov 26, 2020
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Mohit Vaishnav
5 साल 7 महीने पहले
We the people......
Bharath’s Constitution is acknowledged among the Best Constitutions globally. A Constitution is a dynamic document that both regulates & shapes the evolution of a nation. May we never forget the value of our Constitution and the power it holds! Therefore, let us all pledge to become partners in the development of the country by maintaining unity, integrity and harmony of the nation and also pledge to uphold our constitutional values & carry out our duties responsibly.
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vrishbhanath vardhman Gumate
5 साल 7 महीने पहले
संविधान दिवसाच्या हार्दिक शुभेच्छा.
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Nishikant Tiwari
5 साल 7 महीने पहले
I hereby share my ideas on Fundamental Rights as contained in the attached pdf.
निशिकान्त तिवारी
एम0फिल0 जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
पी0एच0डी0 शोधार्थी, पटना विश्वविद्यालय, पटना।
E-Mail : nishikanttiwari@gmail.com
mygov_160638306335658.pdf
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Iyer Adiseshan Subramanian
5 साल 7 महीने पहले
Keep India Clean . I have suggestions about how to keep INDIA clean. My suggestions are outlined below.
Give contract to private business in each state , let them employ more people on the job and these contracts should be renewed based on the performance . State should be fully responsible to keep their state clean . Central Government need to provide required financial and non-financial support to each state. I see this way, we can keep INDIA clean and envy of the world. Do it asap.
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GOPAL PRASAD
5 साल 7 महीने पहले
वर्तमान में संविधान के भाग 4क तथा अनुच्छेद-51क के अनुसार भारत के प्रत्येक नागरिक के कुल 11 मूल कर्तव्य हैं। इसके अनुसार, भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह-
संविधान का पालन करे , और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करें।
स्वतंत्रता के लिये हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को ह्दय में संजोए रखे पालन करें।
भारत की प्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करे और उसे अक्षुण्ण रखे।
.....
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Kuldeep Shukla
5 साल 7 महीने पहले
अधिकारों से ज्यादा कर्तव्यों की बात करनी चाहिए।हम भारत के नागरिक होने के नाते अपने कर्तव्यों को जानें और ईमानदारी से अपने कर्तव्यों को करें।
अभी अधिकांश लोग अधिकारों की बात करता है जिससे समाज में उथल पुथल बना रहता है।
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Yuvashree
5 साल 7 महीने पहले
One morning I found a dying bird ,a thin thread of life lingering within. It was a parakeet. I took it home and noticed that it wasn't hurt at all but looked dead tired. For the fourteen days we fed the bird and took good care of it and by the time we thought it will be our permanent pet the guy flew away. Yes we didn't cage the bird all these days, though I was little sad on his departure I felt proud that this guy gave me an opportunity to exhibit my compassion to other creatures.
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GOPAL PRASAD
5 साल 7 महीने पहले
भारतीय संविधान में उल्लिखित मूल कर्तव्य भूतपूर्व सोवियत संघ के संविधान से ही प्रभावित हैं।
भारतीय संविधान में भी प्रारंभ में मूल कर्तव्य शामिल नहीं थे , इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में 1975 में आपातकाल की घोषणा की गई थी , तभी सरदार स्वर्ण सिंह के नेतृत्व में संविधान में उपयुक्त संशोधन सुझाने के लिये एक समिति का गठन किया गया था। इस समिति में यह सुझाव दिया कि संविधान में मूल अधिकारों के साथ-साथ मूल कर्तव्यों कासमावेश होना चाहिए। समिति का तर्क यह था कि भारत में अधिकांश लोग अधिकारों
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GOPAL PRASAD
5 साल 7 महीने पहले
यदि व्यक्ति को ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ प्यारी है तो यह भी जरूरी है कि उसमें दूसरों की ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ के प्रति धैर्य और सहिष्णुता विद्यमान हो ।
रोचक बात यह है कि विश्व के अधिकांश लोकतांत्रिक देशों के संविधान में नागरिकों के कर्तव्यों का उल्लेख नहीं किया गया है, उनमें केवल मूल अधिकारों की घोषणा की गई है, जैसे अमेरिका संविधान। कुछ साम्यवादी देशों में मूल कर्तव्यों की घोषण की परंपरा दिखाई पड़ती है। भूतपूर्व सोवियत संघ का उदाहरण इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
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GOPAL PRASAD
5 साल 7 महीने पहले
भारत के संविधान में मूल अधिकारों के साथ मूल कर्तव्यों ( मौलिक कर्तव्यों ) को भी शामिल किया गया है। वस्तुत: अधिकार और कर्तव्य एक-दूसरे के पूरक हैं। अधिकार विहीन कर्तव्य निरर्थक होते हैं जबकि कर्तव्य विहीन अधिकार निरंकुशता पैदा करते हैं।
यदि व्यक्ति को ‘गरिमापूर्ण जीवन’ का अधिकार प्राप्त है तो उसका कर्तव्य बनता है कि वह अन्य व्यक्तियों के गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का भी ख्याल रखे।
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