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#ItsMyDuty- मौलिक कर्तव्यों पर अपनी कहानियां साझा करें

आरंभ करने की तिथि :
Mar 12, 2020
अंतिम तिथि :
Nov 26, 2020
23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

11 मौलिक कर्तव्यों पर आधारित अपनी कहानियां, वीडियो और आइडिया भेजें! ...

11 मौलिक कर्तव्यों पर आधारित अपनी कहानियां, वीडियो और आइडिया भेजें!

इस वर्ष 26 नवंबर, 2019 को भारतीय संविधान को अपनाने की 70 वीं वर्षगांठ के अवसर पर भारत सरकार ने भारतीय संविधान के अध्याय IV-A (अनुच्छेद 51A) में वर्णित मौलिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए एक अभियान की शुरुआत की है।

मौलिक कर्तव्य सभी नागरिकों के लिए दिशा-निर्देश हैं। मौलिक कर्तव्यों के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक पर है। यद्यपि इसे कानूनी रूप से लागू नहीं किया जा सकता है, फिर भी इनका अनुपालन बेहद महत्वपूर्ण व अनिवार्य है। क्योंकि एक व्यक्ति के लिए जो कर्तव्य है वह किसी अन्य व्यक्ति का अधिकार है।

इन मौलिक कर्तव्यों का पालन करके और इसे मजबूत बना कर, हम, एक नागरिक के तौर पर अपने देश और अन्य नागरिकों के प्रति अपने कर्तव्यों को पूरा करने में एक सकारात्मक और प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं और विश्व में अपने देश का नाम रौशन कर सकते हैं। न्याय विभाग के सहयोग से

MyGov आपको 11 मौलिक कर्तव्यों पर अपनी कहानियों, वीडियो या आइडिया साझा करने के लिए आमंत्रित करता है।
a. संविधान का पालन करें और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्र ध्वज और राष्ट्रगान का आदर करें।
b. स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोए रखें और उनका पालन करें।
c. भारत की प्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करे और उसे अक्षुण्ण रखें।
d. देश की रक्षा करे और आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करें।
e. भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करे जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग पर आधारित सभी भेदभाव से परे हो, ऐसी प्रथाओं का त्याग करे जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध है।
f. हमारी सामासिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझे और उसका परिरक्षण करें।
g. प्राकृतिक पर्यावरण की, जिसके अंतर्गत वन, झील, नदी और वन्य जीव हैं, रक्षा करें और उसका संवर्धन करे तथा प्राणी मात्र के प्रति दया भाव रखें।
h.वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें।
i. सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखें और हिंसा से दूर रहें।
j. व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करे, जिससे राष्ट्र निरंतर बढ़ते हुए प्रयत्न और उपलब्धि की नई उंचाइयों को छू ले।
k. यदि माता-पिता या संरक्षक हैं, छह वर्ष से चौदह वर्ष तक की आयु वाले अपने, यथास्थिति, बालक या प्रतिपाल्य के लिए शिक्षा के अवसर प्रदान करें।

तकनीकी पैमाने:
आप निम्न प्रारुपों में अपनी प्रविष्टियाँ साझा कर सकते हैं:
• जेपीजी / जेपीईजी
• पीडीएफ
• यूट्यूब यूआरएल

जमा करने की अंतिम तिथि 26 नवंबर 2020 है।

फिर से कायम कर देना
53462 सबमिशन दिखा रहा है
RISHIDEV ARYA
RISHIDEV ARYA 5 साल 7 महीने पहले
Fundamental Duty 9- To Safeguard The Public Property सार्वजनिक सम्पत्ति सभी के लिये होती है। हमें यह जानना आवश्यक है कि सार्वजनिक सम्पत्ति पर किसी व्यक्ति-विशेष अथवा समुदाय-विशेष का अधिकार नहीं होता। इसलिये सार्वजनिक सम्पत्ति का संरक्षण हमारा कर्तव्य है। अक्सर देखा गया है कि कुछ लोग सार्वजनिक सम्पत्ति जैसे बसों को फूंक देते हैं; इमारत तोड़ देते हैं। यह सही नहीं है। बसें फूँक देने और इमारत तोड़ देने से अन्ततः जनता और देश का ही नुकसान होता है। Such public property should be conserved.
Nandakumaran_Moorkath
Nandakumaran_Moorkath 5 साल 7 महीने पहले
Shame that Millions and Millions of educated indians DO NOT shout that it is faulty election system that is the curse OF CORRUPTION AND 99 % problems of the nation and these faulty election systems have created a situation that more than 90 percent of elected MPs and MLAs and people representiaties at village and municipality are SELFISH TO the Core & are Bothered ONLY to LOOT to make their family members FREE OF Poverty &Let india GO to Hell! SHAME!
Abhey Kumar Rajput
Abhey Kumar Rajput 5 साल 7 महीने पहले
धर्माचरणी हिन्दू ही हिन्दू राष्ट्र स्थापित कर सकते हैं ! राष्ट्ररचना करने के इच्छुक नेता और उनके अनुयायियों में नैतिक (आध्यात्मिक) प्रेरणा होना आवश्यक है । धर्माचरणी हिन्दुआें में ही खरी नैतिक प्रेरणा जागृत होती है । इसलिए वे हिन्दू राष्ट्र की स्थापना में प्रत्यक्ष भाग ले सकेंगे ।
Abhey Kumar Rajput
Abhey Kumar Rajput 5 साल 7 महीने पहले
धर्मरक्षा हेतु संगठित लोग हिन्दुत्वनिष्ठ विचारधारा के हों, तब भी प्रत्येक की प्रवृत्ति एवं सोच भिन्न होती है । हिन्दुत्वनिष्ठ कार्यकर्ताआें में कुछ तो व्यसनी होते हैं और कुछ वाममार्गी । संक्षेप में, जिस प्रकार का आचरण अनेक राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता करते हैं, उसी प्रकार का आचरण हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों के कार्यकर्ता करते दिखाई देते हैं । हिन्दुत्वनिष्ठ कार्यकर्ताआें की वर्तमान स्थिति के विषय में विचार करें, तो निम्नांकित बातें ध्यान में आती हैं ।
Abhey Kumar Rajput
Abhey Kumar Rajput 5 साल 7 महीने पहले
यद्यपि सभी लोग हिन्दू धर्म और हिन्दूराष्ट्र के लिए ही कार्य करते हैं, तथापि सनातन धर्म का अध्ययन न होनेके कारण अनेक लोगों को यह पता ही नहीं रहता कि हिन्दू धर्म में ज्ञान का कितना भव्य अक्षय भण्डार है तथा अन्य धर्मों में इसका लाखवां अंश भी नहीं है ।
Abhey Kumar Rajput
Abhey Kumar Rajput 5 साल 7 महीने पहले
अनेक लोग साधना नहीं करते । इसलिए उन्हें पता नहीं होता कि हिन्दू धर्म व्यक्ति को सर्वोच्च स्तर की अनुभूति दान करता है तथा अन्त में अद्वैततक पहुंचाता है ।
Abhey Kumar Rajput
Abhey Kumar Rajput 5 साल 7 महीने पहले
व्यवहार में यदि कोई हमारी सहायता करता है, तो हमें उसके प्रति कृतज्ञता लगती है । हिन्दू धर्म जन्म- मृत्यु के चक्र से सदा के लिए मुक्ति दिलाता है; परन्तु यह ज्ञात न होने के कारण हिन्दू धर्म में जन्म होने पर भी अनेक लोगों को उसके प्रति कृतज्ञता नहीं लगती ।
Abhey Kumar Rajput
Abhey Kumar Rajput 5 साल 7 महीने पहले
कुछ लोग केवल मानसिक स्तर पर धर्म के प्रति अभिमान रखते हैं, इसलिए कभी-कभी वे धर्मद्रोही कार्य भी कर जाते हैं । उदाहरण के लिए, श्रीलंका में तमिल हिन्दुआें पर अत्याचार हुआ । उस समय बंगाल की मुख्यमन्त्री ममता बनर्जी ने केन्द्र के तत्कालीन कांग्रेस शासन की तटस्थ भूमिका का समर्थन किया । उनका विरोध करने के लिए तमिल हिन्दुआें ने बंगाली मूल के महर्षि अरविंद के पुदुचेरी स्थित आश्रम पर आक्रमण किया । सन्त जाति, प्रान्त, भाषा एवं अस्मिता से परे होते हैं ।
Abhey Kumar Rajput
Abhey Kumar Rajput 5 साल 7 महीने पहले
कुछ लोग पद-प्रतिष्ठा पाने के लिए अथवा राजनीतिक स्वार्थ साधने के लिए धर्मरक्षा का कार्य करते हैं । वास्तव में धर्म को, अर्थात ईश्वर को धर्म की रक्षा के लिए किसी की आवश्यकता नहीं होती । धर्मग्लानि होने पर ईश्वर स्वयं अवतार लेते हैं अथवा किसी के माध्यम से वह कार्य करते हैं । इसमें अपनी साधना के रूप में हमें सम्मिलित होना चाहिए ।