Home | MyGov

Accessibility
ऐक्सेसिबिलिटी टूल
कलर एडजस्टमेंट
टेक्स्ट साइज़
नेविगेशन एडजस्टमेंट

How will you celebrate #BapuAt150?

आरंभ करने की तिथि :
Mar 08, 2019
अंतिम तिथि :
May 31, 2019
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

2019 is the year of Bapu’s 150th Birth Anniversary. What do the teachings and work of the Mahatma mean to you? How will you inculcate Bapu’s work in your daily life and ...

2019 is the year of Bapu’s 150th Birth Anniversary. What do the teachings and work of the Mahatma mean to you? How will you inculcate Bapu’s work in your daily life and celebrate this year? How will you put Bapu’s thoughts into action in your home, your community and society at large and make #Bapu150 a mass movement? Share your stories, thoughts and ideas here!

फिर से कायम कर देना
3015 सबमिशन दिखा रहा है
Mitul Kansal
Mitul Kansal 7 साल 4 सप्ताह पहले
‘‘महात्मा गांधी की शिक्षा आज भी प्रासंगिक है, जब विश्व हिंसक और चरमपंथी ताकतों का सामना कर रहा है.’’विघटनकारी ताकतों के इरादों को विफल करने तथा राज्य और देश को मजबूती से जोड़ने के लिए महात्मा गांधी के उपदेशों को अपनाया जाना चाहिए.
Mitul Kansal
Mitul Kansal 7 साल 4 सप्ताह पहले
भारत में महिलाओं की शिक्षा चूँकि ज्यादा नहीं हो पाती है इसलिए महिलाओं की ऐसी शिक्षा की व्यवस्था करनी चाहिए कि बालिकाओं को हाईस्कूल और इन्टरमीडिएट करने के साथ-साथ कोई ऐसी शिक्षा हो जो उनकी सभ्यता और संस्कृती से जुड़ी हुई हो और उस शिक्षा के द्वारा वह अपनी जीविका चला सके। जिससे उन्हें अपनी जरूरत की सभी चीजों के लिए किसी और के ऊपर निर्भर न होना पड़े। इसलिए प्रत्येक बालिका को शिक्षा के साथ ऐसी कला सिखायी जाय जो उसको अपने घर में रहकर ही स्वरोजगार करके अपनी तथा अपने परिवार की जीविका चला सके।
Mitul Kansal
Mitul Kansal 7 साल 4 सप्ताह पहले
उन स्कूलों और कॉलेजों में जहाँ लड़कियों और महिलाओं की संख्या अधिक हों, वहाँ डिजाइनिंग, ड्राइंग, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल, मिडवाइफरी, घरेलू अर्थ प्रबन्ध, पुस्तकालय, विज्ञान आँकड़ा, प्रोसेसिंग, बुजुर्गों की देखभाल, विज्ञापन कापीराइटिंग, सांख्यिकी, सेनेमाटोग्रैफी, बागवानी और असंख्य ऐसे ही अन्य पाठ्यक्रम अवश्य शुरू किये जाने चाहिए, जो खासतौर से महिलाओं और लड़कियों के लिए तैयार किये गये हों, इससे देश अगली शताब्दी की चुनौतियों का सामना कर सकेगा।
Mitul Kansal
Mitul Kansal 7 साल 4 सप्ताह पहले
कम्प्यूटर शिक्षा भी निचले स्तर से ही शुरू की जा सकती है। किसी लड़के या लड़की के हायर सेकेण्ड्री परीक्षा पास करने तक उन्हें रोजगार के लिए दक्ष बना दिया जाना चाहिए। माध्यमिक स्तर पर किताबी शिक्षा की मात्रा कम की जा सकती है, व्यासायोन्मुखी जानकारी और स्कूल के पुस्तकालय, प्रयोगशाला प्रशिक्षण का प्रबन्ध किया जा सकता है।
Mitul Kansal
Mitul Kansal 7 साल 4 सप्ताह पहले
गांधीजी के विचारों को ध्यान में रखते हुए पहला उपाय यह करना होगा कि निचले स्तर पर शिक्षा को व्यावसायिक बनाया जाये। स्कूल स्तर पर महिलाओं को विशेष कौशल का प्रशिक्षण दिया जा सकता है। हमें कई लाख स्वास्थ्य कायकर्ताओं की आवश्यकता है। ऊपरी मिडिल स्कूल से लेकर वरिष्ठ माध्यमिक स्तर पर प्रशिक्षण का एक खास पाठ्यक्रम तैयार किया जा सकता है।
SUYASH BHARATIYA
SUYASH BHARATIYA 7 साल 4 सप्ताह पहले
Bapu’s 150th Birth Anniversary should be an occasion to kick start profound, directed and well monitored changes in the country based on Bapu’s ideals. My suggestion is to create a separate Ministry with the name “Bapu ko Karyanjali” . This Ministry’s task would be to independently monitor with public participation the progress of works under the different areas held dear and significant by Bapu...say Sanitation, Education etc. and give mandatory suggestions for time-bound course-correction.
Mitul Kansal
Mitul Kansal 7 साल 4 सप्ताह पहले
हालाँकि भारतीय परम्परा में आमतौर पर महिलाओं को सम्मान मिला है और शायद भारत एक मात्र ऐसा देश है जहाँ करोड़ाें लोग अर्धनारीश्वर की पूजा करते हैं और जहाँ मनु ने यह घोहणा की कि जहाँ नारी का सम्मान होता है वहाँ देवता प्रसन्न रहते हैं। यह सत्य है कि भारतीय महिलाएँ आज भी कुल मिलाकर निरक्षर और अशिक्षित हैं तथा वांछित रूप में अपनी आवाज संसद या विधान मण्डलों में उठाने में असमर्थ हैं।
Mitul Kansal
Mitul Kansal 7 साल 4 सप्ताह पहले
गांधीजी के अनुसार शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो लड़के-लड़कियों को स्वयं के प्रति अधिक उत्तरदायी बना सके और एक-दूसरे के प्रति अधिक सम्मान की भावना पैदा कर सके। महिलाओं के लिए ऐसा कोई कारण नहीं है कि वे अपने को पुरुषों का गुलाम अथवा पुरुषों से घटिया समझें, उनकी अलग पहचान नहीं है बल्कि एक ही सत्ता है। अतः महिलाओं को सलाह है कि वे सभी अवांछित और अनुचित दबावों के खिलाफ विद्रोह करें। इस तरह के विद्रोह से कोई क्षति होने की आशा नहीं है। इससे तर्कसंगत प्रतिरोध होगा और पवित्रता आयेगी।
Avinash Mishra
Avinash Mishra 7 साल 4 सप्ताह पहले
"अपने विद्यार्थियों को महात्मा गांधीजी के जीवन के संघर्षों, सफलताओं और उच्च विचारों से नित्य अवगत कराता रहता हूँ।"