dr anurag kapil
3 महीने 1 week पहले
स्वास्थ शिक्षक अनुराग कपिल की कलम से दिनांक 15 जनुअरी २०२१
आओ माँ प्रकृति के आँचल मैं आओ! स्वस्थ सुखी सूंदर हो जाओ!!
मेडिकल साइंस (allopathy) का इज़ाद आपातकालीन उपचार हेतु हुआ था ! मनुष्य ने उसे सिरदर्द जुकाम फुंसी फोड़े जैसे समान्य रोगो की चिकित्सा बना डाला !! एलॉपथी सिर्फ इमरजेंसी हालातों के लिए ही प्रयोग मे लाइ जानी चाइये सामान्य रोगो में इसका प्रयोग घातक होता है ! लेकिन मरीज को धैर्य नहीं है तुरंत आराम की इच्छा मनुष्य के लिए हानिकारक ही साबित हुई है !! मनुष्य का आलस्य भी इसमें सहायक रहा है ! मनुष्य प्रयत्न नहीं करेगा बस रेडीमेड इलाज दे दो चाहे जहर की थोड़ी मात्रा ही सही पानी या दूध से ले लेगा ! शरीर को नुक्सान होता है कोई परवाह नहीं कोण सा पता चल रहा है क्या नुक्सान हुआ जब तक पता चलता है देर हो चुकी होती है ! (allopaths) को अपने रोगिओं को बताना चाइये दवाई के क्या नुक्सान है सिर्फ दवाई पर लिख देना की परामर्श के बाद ही सेवन करें पर्याप्त नहीं है ! परिणाम लोग भुगत रहे है अज्ञानतावश जहर खाने को विवश हैं !!
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