JAIDEV SANGAL
8 साल 1 महीना पहले
मेरा नाम जयदेव संगल है काफी कुछ साेचने के बाद मेरे मन में अाया िक अपने मन की बात अापसे रख्ाू । मुझे लगता है िक देश्ा की हर समसया का समाध्ाान िश्ाक्षा ही है । पुराने समय से लेकर अब तक वहीं देश्ा तरक्की कर सका है िजस देश्ा की िश्ाक्षाा पद्धति में देश्ा भ्ािक्त तथ्ाा संसकाराे की िश्ाक्षा दी जाती है । मतलब यह है िक अगर बचपन की िश्ाक्षाा से ही कहानी अादि के माध्यम से देश्ा भ्ािकत तथ्ाा संसकाराे की कहानीयाॅ पाठयकम में सम्मलित कर ली जाये ताे देश्ा में काफी समसयाअाे का समाध्ाान हाे जायेगा ।
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