digvijay trivedi
1 year 9 months ago
प्राचीन भारतीय ज्ञान परम्पराओं एवं आयुर्वेद में सहजन को व्यापक महत्व दिया है। वर्तमान में विभिन्न विश्वव्यापी वैज्ञानिक शोध पत्रों एवं आधुनिक प्रयोगशालाओं में भी सहजन की पोषण शक्तियों का अध्ययन और इसमें अत्याधिक मात्रा में पाये जाने वाले पोषक तत्वों को स्पष्ट किया है। उच्च पोषक तत्व और देश के लगभग सभी भौगोलिक क्षेत्रों में व्यापक सुलभता होने पर भी सहजन के वृक्ष सम्बन्धी जागरूकता एवं उसका सद्ुपयोग खासकर उत्तर भारत में लगभग नगण्य है। उत्तर प्रदेश सरकार के नियंत्रणाधीन संस्था @sifpsa द्वारा एक जागरूकता कार्यक्रम चलाकर इस आरोग्य वृक्ष के प्रति सामाजिक संवेदीकरण करने का प्रयास किया जा रहा है, महिलायें एवं किशोरियाँ, सहजन को अपने नियमित भोजन में सम्मिलित कर इसके पोषक तत्वों से लाभान्वित हो सके। सहजन अत्यधिक कम लागत में ताजा, शुद्ध एवं गुणवत्तापरक नेसर्गिक आहार पूरक है और प्रधानमंत्री जी का सहजन के पौष्टिक गुणों को संज्ञान देने से जन-जागरूकता एवं इसका उपयोग बढ़ेगा और पोषण सम्बन्धी सूचकांकों में व्यापक सुधार होने की संभावना बढ़ेगी।
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