OM PRAKASH SINHA
6 months 3 weeks ago
माननीय प्रधानमंत्री जी, सादर नमस्ते।
आज मैं कुछ वन्यजीवों के अपने अनुभव के माध्यम से पर्यावरण पर पड़ रहे खतरे को लेकर प्रकाश डालना चाहता हूं।
हमारे देश में कभी बंदर बहुतायत मात्रा में पाये जाते थे।पर वृक्षों की अंधाधुंध कटाई के कारण ये बंदर आज अपने आप को बचाने हेतु संघर्ष कर रहे हैं।बेचारे ये गिने चुने और लाचार बंदर अब मानव निर्मित बड़े बड़े मकानों को ही वृक्ष समझकर रहने का प्रयास करते हैं।पर जब भी ये मानवों के करीब आते हैं,तो मानव इन्हें एक रोटी देने के बजाय हट... ढह...जैसे शब्दों से और लाठी से डराकर भगा देते है।
हम बचपन में अक्सर सियार देखा करते थे। जब सारस पक्षी तालाबों में उतरती थी, तो सुंदरता देखते बनती थी। गौरैया और गिलहरी भी अब कम ही दिखाई पड़ती है।
हम मानवों ने धरती पर जंगलों का सफाया कर कब्जा तो किया ही है,साथ ही आसमान में बिजली के खुले तार हम मानवों ने ऐसे फैला रखी है,मानो,पूरे पर्यावरण पर मानवों का ही एकाधिकार है। कई बार पक्षी,बंदर इत्यादि जानवर इस खुले तारों की चपेट में आ जाते हैं।
वन्यजीव प्रकृति के सुंदरता बढ़ाने वाले फूल हैं, जिन्हें बचाया जाना जरूरी है। जय हिन्द
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