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खादी के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार

आरंभ करने की तिथि :
Feb 01, 2015
अंतिम तिथि :
Apr 01, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
खादी कपड़े का नमूना मात्र नहीं है। यह दर्शन, जीनेकी राह, सशक्तीकरण, ...
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Prakash Gupta
11 साल 4 महीने पहले
Man ki baat should be from heart with masses and from head with others and not vice versa.
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s rambabu
11 साल 4 महीने पहले
Gas issue is not small issue that balance amount back amount is not digest by every one ,the problem will lose governments,so immidiatly with draw,is most urgent
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Saket Tyagi
11 साल 4 महीने पहले
सेवा में श्रीमान प्रधानमंत्री जी । निवेदन यह है कि प्रार्थी मौनपालन का रोजगार करना चाहता है जिसका प्रार्थी ने प्रशिक्षण भी किया है ।इसलिए मैंनेपिछले साल प्धानमंत्री रोजगार योजना मे आवेदन किया था जिसे विभाग द्वारा स्वीकृत कर भारतीय स्टैट बैंकADB देवबंद सहारनपुर उत्तर प्रदेश को 3माह पूर्व भेज दिया गया है परन्तु बैंक फील्ड आफिसर अकारण ही विलम्ब किया जा रहा है ।अतः महोदय से निवेदन है किप्रार्थी को स्वरोजगार हेतु ऋण दिलवाने की कृपा करे ।साकेत पुत्र श्री मनोज, ग्राम -साधारणपुर,जि-सहारनपुर( उo प्रo)
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SUDHANSHU kumar Sultania
11 साल 4 महीने पहले
keJARIWAL KI JIT,BJP KI HAR NAHI HAI.public ne MODI K VIRODH MEIN VOTE NAHI DIA H.public ne modi k better performance ko best performance banane k liye kejariwal ko Push/pressure power k rup mein paida kia h. this will be good for bjp in future
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Mamta Tripathi
11 साल 4 महीने पहले
खादी: हमारे स्वावलम्बन का स्रोत....
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Mamta Tripathi
11 साल 4 महीने पहले
एक अभिव्यक्ति खादी के प्रति....
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Mamta Tripathi
11 साल 4 महीने पहले
खादी
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Mamta Tripathi
11 साल 4 महीने पहले
मन की स्वतन्त्रता और विचारों की आजादी।
सशक्तीकरण का सशक्त माध्यम है यह खादी।
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Mamta Tripathi
11 साल 4 महीने पहले
बनें स्वावलम्बी रोकें बर्बादी।
आओ हम अपनायें खादी॥
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Mamta Tripathi
11 साल 4 महीने पहले
जब कोई वस्तु फैशन बन जाती है अर्थात् प्रचलन में आ जाती है तब उसके विशेष प्रचार की आवश्यकता नहीं पड़ती। समाज जिनके पदचिह्नों पर चलता है और जिनका अनुसरण करता है, उन लोगों को को एक बार खादीमय होंने की देर है कि बस सम्पूर्ण खादी उत्पाद समादृत हो जायेगा। आज का खादी उद्योग पचास वर्ष पूर्व का मात्र सूत्रकेन्द्रित उद्योग नहीं रह गया है अपितु यह अन्य अनेक क्षेत्रों में विभिन्न नवाचारों के माध्यम से प्रवेश पा चुका है। अब खादी एकांगी नहीं अपितु बहुविध है तथा बहुउद्देश्यीय है।
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