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शिकायत निवारण तंत्र-2021 पर एनसीवीईटी के मसौदा दिशानिर्देशों पर सुझाव आमंत्रित

Inviting suggestions on draft Guidelines of NCVET on Grievance Redressal Mechanism-2021
आरंभ करने की तिथि :
Sep 10, 2021
अंतिम तिथि :
Sep 30, 2021
23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

राष्ट्रीय व्यवसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) को 5 ...

राष्ट्रीय व्यवसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) को 5 दिसंबर 2018 को अधिसूचना संख्या SD-17/113/2017-E&PW के माध्यम से एक व्यापक कौशल नियामक के रूप में अधिसूचित किया गया था। एनसीवीईटी व्यवसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण में लगी संस्थाओं के कामकाज को विनियमित करने के लिए जिम्मेदार है, दोनों लंबी और अल्पकालिक, और ऐसी संस्थाओं के कामकाज के लिए न्यूनतम मानक स्थापित करता है।

एनसीवीईटी को शिकायत निवारण से संबंधित निम्नलिखित कार्यो का कार्यभार भी दिया गया है:
a. एनसीवीईटी के तत्वावधान में मान्यता प्राप्त निकायों के कामकाज से संबंधित किसी भी सूचीबद्ध शिकायतों के खिलाफ पीड़ित व्यक्ति (व्यक्तियों) को निवारण प्रदान करें।
b. मान्यता प्राप्त निकायों को अपने संबंधित पीड़ित व्यक्ति (व्यक्तियों) की शिकायतों का निवारण करने के लिए, और किसी भी दंड सहित उपचारात्मक कार्रवाई प्रदान करना।
एनसीवीईटी को शिकायतों के निवारण के लिए मान्यता प्राप्त निकायों के दायित्वों को बताते हुए शिकायत निवारण तंत्र पर दिशानिर्देश तैयार करने और शिकायत निवारण की एक प्रणाली की स्थापना पर सिफारिशें प्रदान करने का कार्यभार भी दिया गया है।

उपरोक्त जनादेश के अनुसरण में, एनसीवीईटी ने 'शिकायत निवारण तंत्र पर एनसीवीईटी के दिशानिर्देश - 2021' का मसौदा विकसित किया है।
यह दस्तावेज उन शिकायतों की श्रेणियों को समाहित करता है जिन्हें एनसीवीईटी और उसके मान्यता प्राप्त निकायों द्वारा निपटाया जाएगा, और एनसीवीईटी और इसके मान्यता प्राप्त निकायों द्वारा हितधारकों द्वारा प्रस्तुत शिकायतों की विभिन्न श्रेणियों को संबोधित करने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया में अपनाया जाएगा। इसका उद्देश्य शिकायत निवारण तंत्र की संपूर्ण प्रक्रियाओं पर स्पष्टता प्रदान करना है। दिशानिर्देशों का उद्देश्य शिकायत निवारण के अपेक्षित/संभावित परिणामों का वर्णन करना भी है।

जनता से 30 सितंबर 2021 तक प्रस्तावित दिशा-निर्देशों पर टिप्पणियां आमंत्रित हैं

'शिकायत निवारण तंत्र पर एनसीवीईटी के दिशानिर्देश - 2021' के मसौदे को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- PDF(847KB)

फिर से कायम कर देना
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sunil mahadev dabbi
sunil mahadev dabbi 4 साल 9 महीने पहले
शीकायत की आत्मा होती है शब्द और इन शीकायतोके शब्दोमें शीकायतकर्ताकी पीडा को हम समजकर उसका नीवारण कर पाते तो सही मायनेमें प्रशासन व्यवस्था की व्याख्या अधोरेखित होगी अक्सर ऐसा होता है की अधिकारीक क्षेत्रके लोग शीकायतके शब्दोसे कसरत कर शीकायत की आत्माको निरस्त करने के कोशीशमें जुट जाते है अगर इस मोर्चेमे हमे लगाम लगाने नुस्खा मील जाता है (ऑडिओ-व्हिडिओ रिकॉर्डिंग) तो अपराध क्षेत्रमें शीकायतोंका डर बना रहेगा...
hgXXXXXXgc
hgXXXXXXgc 4 साल 9 महीने पहले
मौजुदा समय की सबसे बडी़ समस्या है महंगाई, क्या हमारे देश की सरकार इतना वेवश है कि इसे नियंनत्रण नहीं कर सकते? हम मध्यवर्गीय युवा बहुत ही खराब दौर से गुजर रहे हैं। अफसोष!
PARTHA CHAUDHURI
PARTHA CHAUDHURI 4 साल 9 महीने पहले
While the GOGRMON defines a grievance eligible for adjudication under the GRM in universal terms, the scope for lodging a grievance is narrowed down later in the document where the term ‘stakeholders’ precludes the guardians of the trainees who are bearing the cost of training in the face of financial difficulties, as also other citizens concerned that the drive to up-skill the Nation’s workforce succeeds. The GOGRMON must include them as stakeholders.
Rameshwar Lal Takhar
Rameshwar Lal Takhar 4 साल 9 महीने पहले
कर्ज से परेशान होकर किसान आत्महत्या कर रहे हैं सरकार ध्यान नहीं दे रही है खेती लाभ का सौदा नहीं रही इससे बैंकों का कर्ज नहीं चुका पा रहे किसान और मजबूर होकर आत्महत्या कर रहे हैं खेती से अपने बच्चों का पेट बड़ा मुश्किल हो रहा है बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है आपसे निवेदन है कि इस पर जरूर गौर फरमाएं एक किसान
Dinesh kumar pandey_5
Dinesh kumar pandey_5 4 साल 9 महीने पहले
Umang app me complain karane ka bhi option hona chahiye kyo ki complain karane ke bad bhi kaam nahi hota hai aur false msg aata hai ki kaam ho gaya sath hi complain karane ke baad sambandhit adhikari par immediate action lene ki bhi bewastha honi chahiye sath hi complain karane wale se pucha jana chahiye ki kaam pura hogaya ya nahi.