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विसाका -वित्तीय साक्षरता अभियान (डिजिटल वित्तीय साक्षरता अभियान) पर श्री प्रकाश जावडेकर के साथ माईगोव टॉक

जैसे-जैसे हम नकदी-निर्भर अर्थव्यवस्था से नकदी-रहित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ते हैं, हम बेहतर सामाजिक बराबरी, उच्च राजस्व संग्रह के माध्यम से विकास कार्य के लिए अधिक संसाधनों की उपलब्धता, नकली मुद्रा के उन्मूलन, अवैध लेनदेन में कमी और काले धन पर रोक की उम्मीद करते हैं।

`वित्तीय साक्षरता अभियान ' का मकसद, उच्चतर शिक्षा संस्थानों के युवाओं / छात्रों को सक्रिय रूप से साथ मिलाना और धनराशि हस्तांतरण के लिए डिजिटली रूप से सक्षम नकद रहित आर्थिक प्रणाली का उपयोग करने के लिए सभी प्रदाताओं और प्राप्तकर्ताओं को प्रोत्साहित और प्रेरित करना है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय देश में उच्च शिक्षा संस्थानों, और छात्रों को इस परिवर्तनकारी बदलाव के अग्रणी बनकर कार्य करता देखता है। मंत्रालय का लक्ष्य छात्रों, शिक्षकों को अपने परिसरों और आसपास के समुदायों में विक्रेताओं, दुकानदारों और अन्य कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने के लिए स्वयंसेवकों के रूप में साथ मिलाना है।

माननीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर 23 दिसंबर 2016 को 5.00 बजे से 6.00 बजे तक लाइव टॉक में विसाका पर अपने विचार साझा करेंगे। अपने प्रश्न पूछकर और अपने विचारों और सुझावों को साझा करके इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए विसाका में शामिल हों।
यहां क्लिक करें: https://www.facebook.com/Vittiya-Saksharta-Abhiyan-1345221665541324/ और फेसबुक पर Visaka को फॉलो करें

स्वैच्छिक सेवा देने के लिए यहां क्लिक करें और अधिक जानें: http://mhrd.gov.in/visaka/

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फिर से कायम कर देना
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VIRENDRA SINGH
VIRENDRA SINGH 9 साल 5 महीने पहले
Lot of talking about Online transaction but i have lost my money many time by online transaction. Bank is not given response. There is no police complaint against bank and other. Modi Govt. doing everything ok but now struct because of online transaction. there is not secure. Thanks Modi Sarkar Please call me back my number 8107772155
Akash Agrawal
Akash Agrawal 9 साल 5 महीने पहले
I would like to share my idea on this topic which will lead my country to a developed nation from a developing nation. Sir, The seminars and other such things should be organized in the schools, colleges, universities and other educational institutions as well as other organizations which are headed by Ministry Of HRD. This will lead the students and others to know the benefits of cashless economy. It should be mandatory. And the proof regarding same has to be submitted to Ministry Of HRD.
INDIA Redefined
INDIA Redefined 9 साल 5 महीने पहले
See 7 Years journey of INDIA Redefined in 24 States http://tinyurl.com/gwuuw3o (Activities Pics) http://tinyurl.com/gqsbtdq (Vision) http://tinyurl.com/jj76ja5(Projects Presentation)- A Collaborative Approach.INDIA Redefined has evolved into a PLATFORM,“ONE STOP SOLUTION" (from CSR Chartering to Project Design & Implementation to M&E and Reporting),with 8 lakhs “on the ground” Doers spread across the country,200+ NGOs,Experts(1800+ man-years experience)covering all social verticals.
VIVEK TRIPATHI
VIVEK TRIPATHI 9 साल 5 महीने पहले
महोदय ग्रामीण इलाको मे अभी भी बैक साखाओ की बहुत कमी है इसी लिए बैको मे भीड भाड भी अधिक रहती है । मेरा सुझाव है कि हर 10 km मे एक बैक साखा खोलनी चाहिए जिससे लोगो को बैकिग करने मे सुविधा हो।
VIVEK TRIPATHI
VIVEK TRIPATHI 9 साल 5 महीने पहले
माननीय मंत्री महोदय आपने सतना जिले के रामपुर बाघेलान के सरस्वती शिशु मंदिर के भवन निर्माण के लिए जो राशि प्रदान किये थे उसके लिए विद्यालय परिवार आपका बहुत बहुत आभारी है।
VIVEK TRIPATHI
VIVEK TRIPATHI 9 साल 5 महीने पहले
माननीय मंत्री महोदय डिजिटल पेमेन्ट को बढावा देने के लिए सभी विश्वविद्यालयो एवं कालेजो मे सभी तरह की फीस डिजिटल माध्यम से भुगतान करने का विकल्प दुरंत देना चाहिए। हमारे रीवा मे apsu मे अभी भी dd के माध्यम से फीस ली जाती है।
Trilok Mehta
Trilok Mehta 9 साल 5 महीने पहले
अतः महोदय यह कार्य जितनी जल्दी हो सके उतना देश के हित मे होगा तथा एक ईमानदार करदाता अपने आप को ठगा हुआ सा महसूस नही करेगा.जब श्री अटल जी प्रधान मंत्री थे तब से मेरे मन मे ये विचार था कि हर आदमी का एक नंबर होना चाहिए जो उसके जन्म के बक्त ही उसे मिल जाये और ये नंबर पिन का एक्सटेंशन होना चाहिए जिससे व्यक्ति के पैदा होने का स्थान भी पता चल जाये. इससे शरणार्थियों कि समस्या का भी कुछ हद तक समाधान हो जायेगा. यह नंबर हर जगह अनिवार्य होना चाहिए आदमी के "जन्म से लेकर मरण तक"